झारज्ञान

पत्र 1 · हिंदी भाषा ज्ञान · अध्याय 3

समास: भेद, विग्रह और पहचान

दो या अधिक शब्दों को जोड़कर एक छोटा शब्द बनाना। परीक्षा में प्रश्न आते हैं: 'कौन-सा समास है', 'विग्रह कीजिए' और 'सही समस्त पद चुनिए'।

अंतिम अपडेट: 2026-10-14

इस अध्याय में
  1. समास क्या है: समस्त पद, पूर्वपद, उत्तरपद, विग्रह
  2. समास के भेद और पहचान की कुंजी
  3. अव्ययीभाव समास
  4. तत्पुरुष समास और उसके उपभेद
  5. कर्मधारय समास
  6. द्विगु समास
  7. द्वंद्व समास
  8. बहुव्रीहि समास
  9. एक शब्द, दो समास
  10. समास बनाम संधि, और भेदों में अंतर
  11. योजक चिह्न (-) कब लगाएँ
  12. बार-बार पूछे जाने वाले शब्द
  13. अभ्यास प्रश्न

समास क्या है

दो या दो से अधिक शब्दों को, उनके बीच के कारक-चिह्न या जोड़ने वाले शब्द (का, के लिए, और, जो आदि) हटाकर, एक छोटे नए शब्द में बदलने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। "समास" का अर्थ ही है संक्षेप।

शब्दअर्थउदाहरण (राजपुत्र में)
समस्त पद / सामासिक पदसमास से बना नया शब्दराजपुत्र
पूर्वपदपहला शब्दराज(ा)
उत्तरपददूसरा (अंतिम) शब्दपुत्र
समास-विग्रहसमस्त पद को फिर से तोड़कर उसका पूरा अर्थ लिखनाराजा का पुत्र
विग्रह ही असली कुंजी हैसमास का भेद शब्द को देखकर नहीं, उसके विग्रह को देखकर तय होता है। इसलिए हर शब्द का सही विग्रह लिखना पहले सीखें — भेद अपने-आप दिख जाएगा।

समास के भेद और पहचान की कुंजी

हिंदी व्याकरण में समास के छह भेद माने जाते हैं, और परीक्षाएँ भी इन्हीं छह को आधार मानती हैं। पहचान का सबसे पक्का तरीका है यह देखना कि कौन-सा पद प्रधान है:

समासकौन-सा पद प्रधानपहचानउदाहरण
अव्ययीभावपूर्वपदपहला पद अव्यय; पूरा शब्द अव्यय (क्रियाविशेषण) की तरह काम करता हैयथाशक्ति, प्रतिदिन
तत्पुरुषउत्तरपदविग्रह में कारक-चिह्न आता है (को, से, के लिए, का, में…)राजपुत्र, रसोईघर
कर्मधारयउत्तरपदविशेषण–विशेष्य या उपमान–उपमेय का संबंधनीलकमल, चंद्रमुख
द्विगुउत्तरपदपहला पद संख्या; अर्थ समूह कात्रिलोक, चौराहा
द्वंद्वदोनों पदविग्रह में 'और', 'या', 'अथवा'; बीच में योजक चिह्नमाता-पिता, पाप-पुण्य
बहुव्रीहिकोई नहीं — तीसरा (अन्य) पददोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोधदशानन (रावण), नीलकंठ (शिव)
संस्कृत परंपरा में चार भेदसंस्कृत व्याकरण में समास के चार मुख्य भेद माने जाते हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वंद्व, बहुव्रीहि — और कर्मधारय तथा द्विगु को तत्पुरुष के ही उपभेद माना जाता है। हिंदी की परीक्षाओं में जब तक प्रश्न में अलग से न पूछा जाए, छह भेद ही मानें।

याद रखने का सूत्र: "अ-त-क-द्वि-द्वं-ब" — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि।

1. अव्ययीभाव समास

पहचान: पहला पद (पूर्वपद) अव्यय होता है और प्रधान होता है। बना हुआ पूरा शब्द भी अव्यय बन जाता है — लिंग, वचन या कारक से नहीं बदलता, और वाक्य में प्रायः क्रियाविशेषण का काम करता है।

(क) अव्यय या उपसर्ग से शुरू होने वाले

पहचान के शब्द: यथा, प्रति, आ, भर, बे, नि/निर्, अनु, हर, उप, बा।

(ख) शब्द की आवृत्ति (दोहराव) से बनने वाले

पहला पद संज्ञा, फिर भी अव्ययीभाव"घर-घर", "रातोंरात" में पहला पद अव्यय नहीं है, फिर भी ये अव्ययीभाव हैं, क्योंकि पूरा शब्द वाक्य में अव्यय (क्रियाविशेषण) की तरह काम करता है: "वह घर-घर गया।" इन्हें द्वंद्व न समझें — द्वंद्व में दो अलग शब्द होते हैं (माता-पिता), यहाँ एक ही शब्द दोहराया गया है।

2. तत्पुरुष समास

पहचान: उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न (विभक्ति) लुप्त हो जाता है। विग्रह करते समय वही चिह्न वापस आता है।

जिस कारक का चिह्न लुप्त होता है, उसी के नाम पर उपभेद होता है। कर्ता और संबोधन कारक में तत्पुरुष नहीं होता, इसलिए कारक के आधार पर छह उपभेद हैं:

उपभेदलुप्त चिह्नउदाहरण
कर्म तत्पुरुषकोस्वर्गप्राप्त, गगनचुंबी
करण तत्पुरुषसे, के द्वारा (साधन)तुलसीकृत, हस्तलिखित
संप्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघर, देशभक्ति
अपादान तत्पुरुषसे (अलग होना)पथभ्रष्ट, देशनिकाला
संबंध तत्पुरुषका, के, कीराजपुत्र, गंगाजल
अधिकरण तत्पुरुषमें, परवनवास, घुड़सवार

कर्म तत्पुरुष (को)

करण तत्पुरुष (से, के द्वारा)

करण और अपादान, दोनों में "से""से" का अर्थ साधन हो (किसी चीज़ के द्वारा) तो करण: हस्तलिखित = हाथ से (हाथ के द्वारा) लिखा। "से" का अर्थ अलग होना हो तो अपादान: पथभ्रष्ट = पथ से (हटकर) भ्रष्ट।

संप्रदान तत्पुरुष (के लिए)

अपादान तत्पुरुष (से — अलग होना)

संबंध तत्पुरुष (का, के, की)

अधिकरण तत्पुरुष (में, पर)

तत्पुरुष के अन्य उपभेद

नञ् तत्पुरुष — पहला पद निषेध या अभाव बताता है (अ, अन, न, ना, गैर, बे…)। विग्रह में "न" या "नहीं" आता है:

उपपद तत्पुरुष — उत्तरपद ऐसा कृदंत अंश होता है जो अकेले शब्द के रूप में प्रयोग नहीं होता (ज, कार, स्थ, चर, ज्ञ, द आदि):

अलुक् तत्पुरुष — विभक्ति का लोप नहीं होता, वह समस्त पद में बनी रहती है:

जलज, पंकज — तत्पुरुष या बहुव्रीहि?"जल में जन्म लेने वाला" — इतना ही विग्रह हो तो उपपद तत्पुरुष। अगर विग्रह "जल में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल" लिखा हो, यानी किसी तीसरी चीज़ का नाम बताया गया हो, तो बहुव्रीहि। प्रश्न के विकल्पों और दिए गए विग्रह को देखकर तय करें।

3. कर्मधारय समास

पहचान: उत्तरपद प्रधान; दोनों पदों में विशेषण–विशेष्य का संबंध हो, या एक पद दूसरे की उपमा (तुलना) हो। विग्रह में "है जो", "के समान", "रूपी" जैसे शब्द आते हैं।

(क) विशेषण–विशेष्य ("है जो")

(ख) उपमान–उपमेय ("के समान")

(ग) रूपक ("रूपी")

4. द्विगु समास

पहचान: पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण होता है और पूरा शब्द किसी समूह या समाहार का बोध कराता है। विग्रह में "का समूह" या "का समाहार" आता है।
"सप्तर्षि" में दो चीज़ेंसंधि की दृष्टि से सप्त + ऋषि = गुण संधि। समास की दृष्टि से "सात ऋषियों का समूह" = द्विगु। प्रश्न "संधि" पूछ रहा है या "समास", यह ज़रूर देखें।

5. द्वंद्व समास

पहचान: दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह में "और", "या", "अथवा", "एवं" आते हैं, और समस्त पद में दोनों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) लगता है।

(क) इतरेतर द्वंद्व ("और")

(ख) समाहार द्वंद्व (साथ में "आदि" का भाव)

(ग) वैकल्पिक द्वंद्व ("या", "अथवा")

विपरीत अर्थ वाले जोड़ेजहाँ दोनों पद एक-दूसरे के विपरीत हों (पाप-पुण्य, भला-बुरा, हानि-लाभ), वहाँ प्रायः वैकल्पिक द्वंद्व होता है, क्योंकि दोनों में से एक ही बात सही हो सकती है।

6. बहुव्रीहि समास

पहचान: कोई भी पद प्रधान नहीं होता। दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति, देवता या वस्तु का नाम/विशेषण बनाते हैं। विग्रह के अंत में "जिसका / जिसके / जिसकी / जो … अर्थात् …" आता है।

एक शब्द, दो समास

कई शब्दों में विग्रह बदलने से समास बदल जाता है। परीक्षा में यही सबसे ज़्यादा उलझाता है। नियम सीधा है: विग्रह शब्द का शाब्दिक अर्थ बताए तो कर्मधारय/द्विगु/तत्पुरुष; किसी तीसरे का नाम बताए तो बहुव्रीहि।

शब्दविग्रह 1 → समासविग्रह 2 → समास
पीतांबरपीला है जो अंबर → कर्मधारयपीले हैं अंबर जिसके, अर्थात् कृष्ण → बहुव्रीहि
नीलकंठनीला है जो कंठ → कर्मधारयनीला है कंठ जिसका, अर्थात् शिव → बहुव्रीहि
लंबोदरलंबा है जो उदर → कर्मधारयलंबा है उदर जिसका, अर्थात् गणेश → बहुव्रीहि
महादेवमहान है जो देव → कर्मधारयमहान है देव जो, अर्थात् शिव → बहुव्रीहि
घनश्यामघन के समान श्याम → कर्मधारयघन के समान श्याम है जो, अर्थात् कृष्ण → बहुव्रीहि
चतुर्भुजचार भुजाओं का समूह (आकृति) → द्विगुचार हैं भुजाएँ जिसकी, अर्थात् विष्णु → बहुव्रीहि
त्रिलोचनतीन लोचनों का समूह → द्विगुतीन हैं लोचन जिसके, अर्थात् शिव → बहुव्रीहि
दशाननदस आननों का समूह → द्विगुदस हैं आनन जिसके, अर्थात् रावण → बहुव्रीहि
प्रश्न में विग्रह न दिया हो तो?अगर केवल शब्द दिया है और विकल्पों में दोनों समास हैं, तो देवता/व्यक्ति के प्रसिद्ध नाम (दशानन, नीलकंठ, लंबोदर, चक्रपाणि) को प्रायः बहुव्रीहि मानें। अगर विकल्पों में केवल एक ही समास है, तो वही उत्तर है।

समास बनाम संधि, और भेदों में अंतर

अंतरपहलादूसरा
संधि बनाम समाससंधि: वर्णों का मेल, ध्वनि बदलती है (विद्या + आलय = विद्यालय)समास: शब्दों का मेल, बीच के चिह्न हटते हैं (विद्या के लिए आलय = विद्यालय)
संधि-विच्छेद बनाम विग्रहसंधि-विच्छेद में लगाते हैं: हिम + आलयविग्रह में पूरा अर्थ लिखते हैं: हिम का आलय
कर्मधारय बनाम बहुव्रीहिकर्मधारय: उत्तरपद प्रधान, अर्थ शाब्दिक (नीला कंठ)बहुव्रीहि: तीसरा पद प्रधान, अर्थ किसी और का (शिव)
द्विगु बनाम बहुव्रीहिद्विगु: संख्या + समूह (चौराहा = चार राहों का समूह)बहुव्रीहि: संख्या + तीसरे का बोध (चतुर्भुज = विष्णु)
द्विगु बनाम कर्मधारयद्विगु: पूर्वपद संख्या, अर्थ समूहकर्मधारय: पूर्वपद गुणवाचक विशेषण (नीलकमल)
अव्ययीभाव बनाम द्वंद्वअव्ययीभाव: एक ही शब्द दोहराया (घर-घर)द्वंद्व: दो अलग शब्द (माता-पिता)
संधि और समास एक साथएक ही शब्द में दोनों होते हैं, पर अलग प्रश्न में। "विद्यालय": संधि = दीर्घ (विद्या + आलय), समास = तत्पुरुष (विद्या के लिए आलय)। "सप्तर्षि": संधि = गुण, समास = द्विगु।

योजक चिह्न (-) कब लगाएँ

भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक नियमों के अनुसार:

बार-बार पूछे जाने वाले शब्द

इन शब्दों को समास के भेद के साथ याद कर लें। ऊपर के उदाहरणों के अलावा कुछ और महत्वपूर्ण शब्द:

समासशब्द
अव्ययीभावयथाविधि, यथार्थ, प्रत्यक्ष (अक्षि के प्रति), आमरण, यथेष्ट, बेकाम, बखूबी, प्रतिवर्ष, साफ़-साफ़
तत्पुरुषहवनसामग्री, पुस्तकालय, राहखर्च, स्नानघर, मालगाड़ी, ग्रंथकार, राजकुमार, मृगछौना, अछूत, अनाथ, शरणार्थी, प्रेमाश्रु, देवदत्त, कामचोर
कर्मधारयनीलगाय, महाराज, कापुरुष, नराधम, लालटोपी, कमलमुख, पुरुषसिंह, प्राणप्रिय, संसारसागर
द्विगुत्रिकोण, षट्कोण, पंचामृत, दुराहा, तिराहा, चवन्नी, सतसई, नवनिधि, पंचपात्र, चौपाई
द्वंद्वअन्न-जल, रुपया-पैसा, आगे-पीछे, ऊँच-नीच, आना-जाना, सीता-राम, देश-विदेश, लोटा-डोरी, यश-अपयश
बहुव्रीहिचतुरानन (ब्रह्मा), पंचानन (शिव), शूलपाणि (शिव), पवनपुत्र (हनुमान), लंकेश (रावण), वज्रपाणि (इंद्र), सहस्राक्ष (इंद्र), मीनकेतु (कामदेव), अजातशत्रु, निर्धन, बारहसिंगा

अभ्यास प्रश्न

उत्तर देखने के लिए "उत्तर देखें" पर टैप करें।

  1. "यथाशक्ति" में कौन-सा समास है?

    1. (क) तत्पुरुष
    2. (ख) अव्ययीभाव
    3. (ग) द्विगु
    4. (घ) बहुव्रीहि
    उत्तर देखें

    (ख) शक्ति के अनुसार — पहला पद "यथा" अव्यय और प्रधान है।

  2. "राजपुत्र" का सही विग्रह है —

    1. (क) राजा और पुत्र
    2. (ख) राजा के लिए पुत्र
    3. (ग) राजा का पुत्र
    4. (घ) राजा है जो पुत्र
    उत्तर देखें

    (ग) राजा का पुत्र — संबंध तत्पुरुष।

  3. "हस्तलिखित" किस तत्पुरुष का उदाहरण है?

    1. (क) करण
    2. (ख) कर्म
    3. (ग) अपादान
    4. (घ) अधिकरण
    उत्तर देखें

    (क) हाथ से (हाथ के द्वारा) लिखित — "से" साधन के अर्थ में, इसलिए करण।

  4. "पथभ्रष्ट" में कौन-सा तत्पुरुष है?

    1. (क) करण
    2. (ख) संप्रदान
    3. (ग) संबंध
    4. (घ) अपादान
    उत्तर देखें

    (घ) पथ से भ्रष्ट — "से" अलग होने के अर्थ में, अपादान तत्पुरुष।

  5. "रसोईघर" का विग्रह क्या होगा?

    1. (क) रसोई का घर
    2. (ख) रसोई के लिए घर
    3. (ग) रसोई में घर
    4. (घ) रसोई और घर
    उत्तर देखें

    (ख) रसोई के लिए घर — संप्रदान तत्पुरुष।

  6. "नीलकमल" में कौन-सा समास है?

    1. (क) कर्मधारय
    2. (ख) द्विगु
    3. (ग) बहुव्रीहि
    4. (घ) द्वंद्व
    उत्तर देखें

    (क) नीला है जो कमल — विशेषण-विशेष्य, कर्मधारय।

  7. "चंद्रमुख" का सही विग्रह है —

    1. (क) चंद्र का मुख
    2. (ख) चंद्र के समान मुख
    3. (ग) चंद्र और मुख
    4. (घ) चंद्र है मुख जिसका
    उत्तर देखें

    (ख) चंद्र के समान मुख — उपमान-उपमेय, कर्मधारय।

  8. "चौराहा" में कौन-सा समास है?

    1. (क) बहुव्रीहि
    2. (ख) तत्पुरुष
    3. (ग) द्विगु
    4. (घ) अव्ययीभाव
    उत्तर देखें

    (ग) चार राहों का समूह — पहला पद संख्या, अर्थ समूह: द्विगु।

  9. "माता-पिता" में कौन-सा समास है?

    1. (क) तत्पुरुष
    2. (ख) द्वंद्व
    3. (ग) कर्मधारय
    4. (घ) अव्ययीभाव
    उत्तर देखें

    (ख) माता और पिता — दोनों पद प्रधान, इतरेतर द्वंद्व।

  10. "पाप-पुण्य" किस द्वंद्व का उदाहरण है?

    1. (क) इतरेतर
    2. (ख) समाहार
    3. (ग) वैकल्पिक
    4. (घ) यह द्वंद्व नहीं है
    उत्तर देखें

    (ग) पाप या पुण्य — "या" से जुड़ा, वैकल्पिक द्वंद्व।

  11. "दशानन" में कौन-सा समास है (सामान्य अर्थ में)?

    1. (क) बहुव्रीहि
    2. (ख) द्विगु
    3. (ग) कर्मधारय
    4. (घ) तत्पुरुष
    उत्तर देखें

    (क) दस हैं आनन जिसके, अर्थात् रावण — तीसरे पद का बोध, बहुव्रीहि।

  12. "लंबोदर" का बहुव्रीहि विग्रह कौन-सा है?

    1. (क) लंबा है जो उदर
    2. (ख) लंबे उदर का समूह
    3. (ग) लंबा है उदर जिसका, अर्थात् गणेश
    4. (घ) लंबा और उदर
    उत्तर देखें

    (ग) "अर्थात् गणेश" — तीसरे का बोध होने से बहुव्रीहि। "लंबा है जो उदर" कर्मधारय होता।

  13. "पीतांबर" को कर्मधारय मानने पर विग्रह होगा —

    1. (क) पीला है जो अंबर
    2. (ख) पीले हैं वस्त्र जिसके, अर्थात् कृष्ण
    3. (ग) पीला और अंबर
    4. (घ) पीले वस्त्रों का समूह
    उत्तर देखें

    (क) पीला है जो अंबर — शाब्दिक अर्थ, विशेषण-विशेष्य: कर्मधारय।

  14. "घर-घर" में कौन-सा समास है?

    1. (क) द्वंद्व
    2. (ख) अव्ययीभाव
    3. (ग) तत्पुरुष
    4. (घ) कर्मधारय
    उत्तर देखें

    (ख) एक ही शब्द की आवृत्ति, पूरा पद अव्यय की तरह (हर घर) — अव्ययीभाव।

  15. "असत्य" में कौन-सा समास है?

    1. (क) नञ् तत्पुरुष
    2. (ख) बहुव्रीहि
    3. (ग) कर्मधारय
    4. (घ) अव्ययीभाव
    उत्तर देखें

    (क) न सत्य — निषेध, नञ् तत्पुरुष।

  16. "पंकज" (केवल "पंक में जन्म लेने वाला") में कौन-सा समास है?

    1. (क) कर्मधारय
    2. (ख) द्वंद्व
    3. (ग) उपपद तत्पुरुष
    4. (घ) द्विगु
    उत्तर देखें

    (ग) उत्तरपद "ज" अकेले प्रयोग नहीं होता — उपपद तत्पुरुष। "अर्थात् कमल" जोड़ने पर बहुव्रीहि माना जाता है।

  17. "त्रिलोक" का सही विग्रह है —

    1. (क) तीन लोक हैं जिसके
    2. (ख) तीन लोकों का समूह
    3. (ग) तीन और लोक
    4. (घ) तीन के लिए लोक
    उत्तर देखें

    (ख) तीन लोकों का समूह — द्विगु।

  18. "विद्यालय" में संधि और समास क्रमशः हैं —

    1. (क) गुण, कर्मधारय
    2. (ख) दीर्घ, तत्पुरुष
    3. (ग) दीर्घ, बहुव्रीहि
    4. (घ) यण, तत्पुरुष
    उत्तर देखें

    (ख) विद्या + आलय = दीर्घ संधि; विद्या के लिए आलय = संप्रदान तत्पुरुष।

  19. "नीलकंठ" शिव के अर्थ में किस समास का उदाहरण है?

    1. (क) कर्मधारय
    2. (ख) तत्पुरुष
    3. (ग) द्विगु
    4. (घ) बहुव्रीहि
    उत्तर देखें

    (घ) नीला है कंठ जिसका, अर्थात् शिव — बहुव्रीहि।

  20. किस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं?

    1. (क) तत्पुरुष
    2. (ख) बहुव्रीहि
    3. (ग) द्वंद्व
    4. (घ) कर्मधारय
    उत्तर देखें

    (ग) द्वंद्व में दोनों पद प्रधान; बहुव्रीहि में कोई नहीं; तत्पुरुष और कर्मधारय में उत्तरपद।

और अभ्यास चाहिए?पूरे प्रश्न-बैंक और मॉक टेस्ट जल्द ही उपलब्ध होंगे। संधि भी साथ में दोहरा लें: संधि के नोट्स।

संदर्भ

ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:

  • केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी का मानकीकरण (संशोधित संस्करण, 2024), अनुच्छेद 3.4: योजक चिह्न