पत्र 1 · हिंदी भाषा ज्ञान · अध्याय 1
वर्ण विचार और वर्तनी
हिंदी की ध्वनियाँ, उनका वर्गीकरण और सही वर्तनी। परीक्षा में वर्णों की संख्या, उच्चारण-स्थान, घोष-अघोष और 'शुद्ध वर्तनी वाला शब्द चुनिए' जैसे प्रश्न सबसे ज़्यादा आते हैं।
अंतिम अपडेट: 2026-10-14
इस अध्याय में
भाषा, लिपि, वर्ण और वर्णमाला
- भाषा — विचारों को बोलकर या लिखकर व्यक्त करने का साधन।
- लिपि — भाषा को लिखने के चिह्नों की व्यवस्था। हिंदी की लिपि देवनागरी है, जो ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई और बाएँ से दाएँ लिखी जाती है।
- वर्ण — भाषा की वह सबसे छोटी ध्वनि जिसके और टुकड़े नहीं हो सकते: अ, क्, म्। (कामताप्रसाद गुरु इसे "अक्षर" भी कहते हैं।)
- वर्णमाला — किसी भाषा के सभी वर्णों का व्यवस्थित समूह।
- अक्षर (आधुनिक भाषा-विज्ञान में) — एक साँस के झटके में बोली जाने वाली ध्वनि-इकाई, जिसमें एक स्वर अवश्य होता है: "कमल" में तीन अक्षर हैं — क, म, ल।
मानक हिंदी वर्णमाला: कितने वर्ण?
भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक (2024) के अनुसार:
| वर्ग | वर्ण | संख्या |
|---|---|---|
| स्वर | अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ | 11 |
| अयोगवाह (स्वर के साथ लिखे जाते हैं, पर स्वर नहीं गिने जाते) | अं (अनुस्वार), अः (विसर्ग) | 2 |
| मूल व्यंजन | क से ह तक (स्पर्श 25 + अंतःस्थ 4 + ऊष्म 4) | 33 |
| संयुक्त व्यंजन | क्ष त्र ज्ञ श्र | 4 |
| उत्क्षिप्त (द्विगुण) व्यंजन | ड़ ढ़ | 2 |
| विशेष व्यंजन | ळ (हरियाणवी, मराठी आदि के लिए) | 1 |
आगत ध्वनियाँ: अंग्रेज़ी शब्दों के लिए ऑ (कॉलेज, डॉक्टर) और उर्दू-फ़ारसी के लिए नुक्ता वाले क़ ख़ ग़ ज़ फ़ प्रयोग होते हैं। मानक के अनुसार हिंदी में घुल-मिल चुके उर्दू शब्द बिना नुक्ते के लिखे जा सकते हैं (कलम, किला); ये मूल वर्णमाला का हिस्सा नहीं हैं।
स्वर और उसके भेद
जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता के होता है और जिनके बोलते समय हवा मुँह से बिना रुकावट निकलती है, वे स्वर हैं। हिंदी में 11 स्वर हैं।
1. उच्चारण-काल (मात्रा) के आधार पर
| भेद | अर्थ | स्वर |
|---|---|---|
| ह्रस्व स्वर (एकमात्रिक) | सबसे कम समय | अ इ उ ऋ — 4 |
| दीर्घ स्वर (द्विमात्रिक) | ह्रस्व से दुगना समय | आ ई ऊ ए ऐ ओ औ — 7 |
| प्लुत स्वर (त्रिमात्रिक) | तीन गुना समय; पुकारने या मंत्र में | ओ३म्, राऽऽम — चिह्न ३ या ऽ |
2. उत्पत्ति (बनावट) के आधार पर
| भेद | अर्थ | स्वर |
|---|---|---|
| मूल स्वर | जो किसी दूसरे स्वर से नहीं बने | अ इ उ ऋ |
| सजातीय/सवर्ण दीर्घ | एक ही स्वर को दुगना करने से | आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ) |
| संयुक्त (संधि) स्वर | दो भिन्न स्वरों के मेल से | ए (अ+इ), ऐ (अ+ए), ओ (अ+उ), औ (अ+ओ) |
3. जीभ के प्रयोग के आधार पर
| भेद | स्वर |
|---|---|
| अग्र स्वर (जीभ का अगला भाग) | इ ई ए ऐ |
| मध्य स्वर (जीभ का बीच का भाग) | अ |
| पश्च स्वर (जीभ का पिछला भाग) | आ उ ऊ ओ औ |
4. होंठों की आकृति के आधार पर
वृत्ताकार (गोलाकार) स्वर — होंठ गोल होते हैं: उ ऊ ओ औ। अवृत्ताकार स्वर — होंठ गोल नहीं होते: अ आ इ ई ए ऐ।
5. मुख-द्वार के खुलने के आधार पर
| भेद | स्वर |
|---|---|
| विवृत (पूरा खुला) | आ |
| अर्धविवृत (आधा खुला) | अ ऐ औ |
| अर्धसंवृत (आधा बंद) | ए ओ |
| संवृत (लगभग बंद) | इ ई उ ऊ |
6. नाक से हवा निकलने के आधार पर
निरनुनासिक — केवल मुँह से: अ, आ, इ। अनुनासिक — मुँह और नाक दोनों से; चंद्रबिंदु (ँ) से लिखे जाते हैं: अँ, आँ, इँ (आँख, माँ, हँसना)।
7. सवर्ण और असवर्ण
एक ही उच्चारण-स्थान वाले स्वर सवर्ण (सजातीय) हैं: अ-आ, इ-ई, उ-ऊ। भिन्न स्थान वाले असवर्ण: अ-इ, उ-ए। संधि में "सवर्ण" शब्द इसी अर्थ में आता है (दीर्घ संधि = सवर्ण स्वरों का मेल)।
मात्राएँ
व्यंजन के साथ जुड़ने पर स्वर का जो चिह्न लगता है, वह मात्रा है। "अ" की कोई मात्रा नहीं होती — हर व्यंजन में "अ" पहले से रहता है (क = क् + अ)।
| स्वर | मात्रा | उदाहरण |
|---|---|---|
| आ | ा | का |
| इ | ि | कि |
| ई | ी | की |
| उ | ु | कु |
| ऊ | ू | कू |
| ऋ | ृ | कृ |
| ए | े | के |
| ऐ | ै | कै |
| ओ | ो | को |
| औ | ौ | कौ |
व्यंजन और उसके भेद
जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है, वे व्यंजन हैं। हर व्यंजन में "अ" मिला रहता है; बिना स्वर के व्यंजन लिखना हो तो नीचे हल् चिह्न (्) लगाते हैं: क्, म्।
1. स्पर्श व्यंजन (25)
जीभ मुँह के किसी भाग को छूकर हवा रोकती है। पाँच वर्ग, हर वर्ग में पाँच वर्ण, और वर्ग का नाम पहले वर्ण से:
| वर्ग | वर्ण | उच्चारण-स्थान |
|---|---|---|
| क वर्ग | क ख ग घ ङ | कंठ |
| च वर्ग | च छ ज झ ञ | तालु |
| ट वर्ग | ट ठ ड ढ ण | मूर्धा |
| त वर्ग | त थ द ध न | दंत |
| प वर्ग | प फ ब भ म | ओष्ठ |
2. अंतःस्थ व्यंजन (4): य र ल व
इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच का होता है। य, व को अर्धस्वर कहते हैं; र को लुंठित (प्रकंपित) — जीभ काँपती है; ल को पार्श्विक — हवा जीभ के बगल से निकलती है।
3. ऊष्म (संघर्षी) व्यंजन (4): श ष स ह
उच्चारण में हवा रगड़ खाकर निकलती है और गर्माहट-सी पैदा होती है।
4. उत्क्षिप्त (द्विगुण) व्यंजन: ड़ ढ़
जीभ ऊपर उठकर झटके से नीचे गिरती है। ड़, ढ़ शब्द के आरंभ में नहीं आते: सड़क, पढ़ना, बढ़ई। शब्द के शुरू में हमेशा ड, ढ (डर, ढक्कन)।
5. नासिक्य (अनुनासिक) व्यंजन: ङ ञ ण न म
हर वर्ग का पाँचवाँ वर्ण; उच्चारण में हवा नाक से भी निकलती है। इन्हें पंचमाक्षर भी कहते हैं।
6. उच्चारण के तरीके (प्रयत्न) के आधार पर एक नज़र में
| भेद | कैसे | वर्ण |
|---|---|---|
| स्पर्श | हवा पूरी रुककर छूटती है | क से म तक (च वर्ग छोड़कर) |
| स्पर्श-संघर्षी | रुककर रगड़ के साथ | च छ ज झ |
| संघर्षी | रगड़ के साथ | श ष स ह (और फ़, ज़) |
| नासिक्य | नाक से | ङ ञ ण न म |
| पार्श्विक | जीभ के बगल से | ल |
| लुंठित/प्रकंपित | जीभ काँपती है | र |
| उत्क्षिप्त | जीभ झटके से गिरती है | ड़ ढ़ |
| अर्धस्वर | स्वर जैसे | य व |
अल्पप्राण-महाप्राण, घोष-अघोष
प्राण-वायु (साँस) के आधार पर
स्वरतंत्री (गले की कंपन) के आधार पर
उच्चारण-स्थान
मुँह के जिस भाग से वर्ण बोला जाता है, वह उसका उच्चारण-स्थान है। वर्गों के नाम (कंठ्य, तालव्य आदि) इसी से बने हैं।
| स्थान | नाम | वर्ण |
|---|---|---|
| कंठ | कंठ्य | अ आ, क वर्ग (क ख ग घ ङ), ह, विसर्ग (ः) |
| तालु | तालव्य | इ ई, च वर्ग (च छ ज झ ञ), य, श |
| मूर्धा | मूर्धन्य | ऋ, ट वर्ग (ट ठ ड ढ ण), र, ष |
| दंत | दंत्य | त वर्ग (त थ द ध न), ल, स |
| ओष्ठ | ओष्ठ्य | उ ऊ, प वर्ग (प फ ब भ म) |
| नासिका | नासिक्य | ङ ञ ण न म (अपने वर्ग-स्थान के साथ), अनुस्वार |
| कंठ + तालु | कंठ-तालव्य | ए ऐ |
| कंठ + ओष्ठ | कंठोष्ठ्य | ओ औ |
| दंत + ओष्ठ | दंतोष्ठ्य | व |
अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग और हल्
अनुस्वार (ं)
स्वर के बाद आने वाली नासिक ध्वनि, जो अगले व्यंजन के वर्ग के पंचमाक्षर की तरह बोली जाती है। मानक नियम (केंद्रीय हिंदी निदेशालय):
- पंचमाक्षर के बाद उसी वर्ग का व्यंजन आए तो अनुस्वार लिखें: गंगा (गङ्गा नहीं), चंचल, ठंडा, संबंध, संपादक।
- पंचमाक्षर के बाद दूसरे वर्ग का व्यंजन आए तो पंचमाक्षर ही रहेगा: वाङ्मय, उन्मुख, अन्य, सम्राट।
- पंचमाक्षर दोहराया गया हो तो वैसे ही रहेगा: अन्न, सम्मेलन, सम्मान।
चंद्रबिंदु / अनुनासिक (ँ)
स्वर का नाक से उच्चारण। तद्भव और देशज शब्दों में आता है: आँख, चाँद, दाँत, माँ, लड़कियाँ। जहाँ शिरोरेखा के ऊपर मात्रा हो (ि, ी, े, ै, ो, ौ), वहाँ जगह की कमी से चंद्रबिंदु की जगह केवल बिंदु लगता है: में, भैंस, नहीं, गोंद।
अनुस्वार बनाम अनुनासिक
| अनुस्वार (ं) | अनुनासिक (ँ) | |
|---|---|---|
| क्या है | व्यंजन की तरह नासिक ध्वनि | स्वर का नाक से उच्चारण |
| किन शब्दों में | प्रायः तत्सम (संबंध, कंठ) | प्रायः तद्भव/देशज (आँख, चाँद) |
| उच्चारण | अगले वर्ण के पंचमाक्षर जैसा, ज़्यादा ज़ोर | हल्की नासिकता |
विसर्ग (ः)
स्वर के बाद आधे "ह" जैसी ध्वनि; केवल तत्सम शब्दों में: अतः, पुनः, प्रातः, दुःख। मानक के अनुसार हिंदी में घुले तद्भव रूप में विसर्ग हट जाता है: दुख-सुख।
अयोगवाह
अनुस्वार और विसर्ग न पूरी तरह स्वर हैं, न व्यंजन — ये हमेशा किसी स्वर के सहारे ही आते हैं, इसलिए इन्हें अयोगवाह कहते हैं।
हल् चिह्न (्)
स्वर-रहित व्यंजन दिखाता है। मानक के अनुसार हिंदी शब्दों के अंत में हल् प्रायः नहीं लिखा जाता (महान, राजन), पर संस्कृत अव्ययों में रहता है: अर्थात्, पश्चात्, किंचित्। संधि दिखाते समय भी लिखते हैं: जगत् + ईश।
संयुक्त व्यंजन, द्वित्व और र के रूप
- संयुक्त व्यंजन — दो व्यंजनों के मेल से बने स्वतंत्र वर्ण: क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ, श्र = श् + र।
- द्वित्व व्यंजन — एक ही व्यंजन दो बार: पक्का, बच्चा, गद्दा, सम्मान, उल्लास।
- संयुक्ताक्षर लेखन (मानक): खड़ी पाई वाले व्यंजन की पाई हटाकर जोड़ें — ख्याति, व्यास, श्लोक; बिना पाई वाले (ङ छ ट ठ ड ढ द ह) में हल् लगाएँ — वाङ्मय, चिह्न, ब्रह्म; पर द + य/व पारंपरिक रूप में — विद्या, द्वार।
र के चार रूप
| रूप | कब | उदाहरण |
|---|---|---|
| रेफ (र्) — ऊपर | र स्वर-रहित हो और बाद के व्यंजन से पहले आए | धर्म, कर्म, सूर्य, आशीर्वाद |
| पदेन (्र) — नीचे तिरछा | पाई वाले व्यंजन के बाद र | प्रकाश, क्रम, ग्राम |
| नीचे ^ जैसा | बिना पाई वाले व्यंजन (ट, ड) के बाद र | राष्ट्र, ड्रम, ट्रक |
| त्र, श्र | त और श के साथ विशेष रूप | त्रिशूल, श्रम |
मानक वर्तनी के नियम
केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक (2024) के मुख्य नियम, जो "शुद्ध वाक्य/शुद्ध शब्द" वाले प्रश्नों का आधार हैं:
- विभक्ति-चिह्न संज्ञा से अलग, सर्वनाम से मिलाकर: राम ने, राम को — पर उसने, तुमसे, मुझको। सर्वनाम के साथ दो चिह्न हों तो पहला मिलाकर, दूसरा अलग: उसके लिए, आपके लिए। बीच में "ही/तक" आए तो अलग: आप ही के लिए।
- संयुक्त क्रिया के हिस्से अलग: पढ़ा करता है, जा सकता है। पर पूर्वकालिक "कर" मिलाकर: पाकर, करके, रो-रोकर।
- तक, साथ अलग: यहाँ तक, आपके साथ। "वाला" संज्ञा के साथ मिलाकर (दूधवाला) पर क्रिया के बाद अलग (जाने वाला)।
- श्रुतिमूलक य, व: क्रिया में स्वर रूप — गया, गई, गए; विशेषण/संज्ञा में य रूप — नया, नयी, नये।
- ऑ अंग्रेज़ी शब्दों में: कॉलेज, हॉल, ऑफ़िस।
- संस्कृत के शब्द मूल वर्तनी में: महत्त्व, तत्त्व, सत्त्व (महत्व, तत्व नहीं)।
- पूर्ण विराम के लिए खड़ी पाई (।); बाकी विराम-चिह्न अंग्रेज़ी वाले।
वर्तनी की गलतियों के पीछे के 6 नियम
अशुद्ध-शुद्ध शब्दों की सूची
परीक्षा में "शुद्ध वर्तनी वाला शब्द चुनिए" प्रश्नों में यही शब्द बार-बार आते हैं।
| अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|
| आर्शीवाद | आशीर्वाद |
| उज्वल | उज्ज्वल |
| कवियत्री | कवयित्री |
| रचियता | रचयिता |
| सन्यासी | संन्यासी |
| अनाधिकार | अनधिकार |
| उपरोक्त | उपर्युक्त |
| सौंदर्यता | सौंदर्य |
| पूज्यनीय | पूजनीय |
| अहिल्या | अहल्या |
| द्वारिका | द्वारका |
| प्रदर्शिनी | प्रदर्शनी |
| आधीन | अधीन |
| अध्यन | अध्ययन |
| ज्योत्सना | ज्योत्स्ना |
| दुरावस्था | दुरवस्था |
| निरोग | नीरोग |
| सम्राज्य | साम्राज्य |
| कृप्या | कृपया |
| ब्रम्ह | ब्रह्म |
| चिन्ह | चिह्न |
| स्त्रोत | स्रोत |
| श्रृंगार | शृंगार |
| श्रृंखला | शृंखला |
| परिक्षा | परीक्षा |
| प्रमाणिक | प्रामाणिक |
| व्यवहारिक | व्यावहारिक |
| एतिहासिक | ऐतिहासिक |
| अतिथी | अतिथि |
| मंत्रीमंडल | मंत्रिमंडल |
| स्थाई | स्थायी |
| अनुग्रहीत | अनुगृहीत |
| ग्रहिणी | गृहिणी |
| दृष्टा | द्रष्टा |
| सृष्टा | स्रष्टा |
| अत्याधिक | अत्यधिक |
| महत्व | महत्त्व |
| तत्व | तत्त्व |
| शताब्दि | शताब्दी |
| पुरुस्कार | पुरस्कार |
| अंतर्ध्यान | अंतर्धान |
| यथेष्ठ | यथेष्ट |
| संसारिक | सांसारिक |
| औदोगिक | औद्योगिक |
| क्योंकी | क्योंकि |
| बिमारी | बीमारी |
| उन्नती | उन्नति |
| इसलिये | इसलिए |
| गयी (क्रिया) | गई |
| कृत्घन | कृतघ्न |
| प्रज्ज्वलित | प्रज्वलित |
| उत्तरदाई | उत्तरदायी |
| आद्र | आर्द्र |
| बुद्धवार | बुधवार |
| धुम्रपान | धूम्रपान |
| सप्ताहिक | साप्ताहिक |
| नेतिकता | नैतिकता |
| वापिस | वापस |
| अंताक्षरी | अंत्याक्षरी |
| प्रतिछाया | प्रतिच्छाया |
| उच्श्रृंखल | उच्छृंखल |
| सम्मती | सम्मति |
| निरपराधी | निरपराध |
| सुस्वागतम् | स्वागतम् |
| मिष्ठान | मिष्टान्न |
| अक्षोहिणी | अक्षौहिणी |
| श्रोत (स्रोत के अर्थ में) | स्रोत |
| आजीवका | आजीविका |
| इन्द्रा | इंदिरा |
| विधालय | विद्यालय |
| बहुमुल्य | बहुमूल्य |
| उपलक्ष | उपलक्ष्य |
| सहस्त्र | सहस्र |
| अत्यंताभाव ✓ | अत्यंताभाव |
| प्रविष्ठ | प्रविष्ट |
| घनिष्ट | घनिष्ठ |
| कनिष्ट | कनिष्ठ |
| श्रेष्ट | श्रेष्ठ |
| पुष्ठ | पुष्ट |
| निरिक्षण | निरीक्षण |
| उपाधी | उपाधि |
| समिक्षा | समीक्षा |
| प्रतिक्षा | प्रतीक्षा |
| उद्धाटन | उद्घाटन |
| दुसरा | दूसरा |
| अनूकूल | अनुकूल |
| पूर्वान्ह | पूर्वाह्न |
| अपरान्ह | अपराह्न |
| मध्यान्ह | मध्याह्न |
| तदोपरांत | तदुपरांत |
| ईर्षा | ईर्ष्या |
| व्यस्क | वयस्क |
| उष्मा | ऊष्मा |
| ग्रहस्थी | गृहस्थी |
| प्रस्तुतिकरण | प्रस्तुतीकरण |
| सशक्तिकरण | सशक्तीकरण |
अभ्यास प्रश्न
उत्तर देखने के लिए "उत्तर देखें" पर टैप करें।
हिंदी की मानक वर्णमाला में स्वरों की संख्या है —
- (क) 10
- (ख) 11
- (ग) 12
- (घ) 13
उत्तर देखें
(ख) अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ — 11 स्वर (केंद्रीय हिंदी निदेशालय)।
मूल व्यंजनों की संख्या कितनी है?
- (क) 25
- (ख) 35
- (ग) 39
- (घ) 33
उत्तर देखें
(घ) स्पर्श 25 + अंतःस्थ 4 + ऊष्म 4 = 33।
"अनुस्वार" और "विसर्ग" को क्या कहा जाता है?
- (क) संयुक्त स्वर
- (ख) अयोगवाह
- (ग) उत्क्षिप्त
- (घ) अर्धस्वर
उत्तर देखें
(ख) ये स्वर के सहारे आते हैं, न पूरे स्वर न पूरे व्यंजन — अयोगवाह।
इनमें से कौन-सा ह्रस्व स्वर है?
- (क) आ
- (ख) ए
- (ग) ऋ
- (घ) औ
उत्तर देखें
(ग) ह्रस्व स्वर: अ, इ, उ, ऋ।
"ए" और "ऐ" का उच्चारण-स्थान है —
- (क) कंठ-तालु
- (ख) कंठोष्ठ
- (ग) तालु
- (घ) मूर्धा
उत्तर देखें
(क) ए, ऐ — कंठ-तालव्य; ओ, औ — कंठोष्ठ्य।
"व" का उच्चारण-स्थान क्या है?
- (क) ओष्ठ
- (ख) दंत
- (ग) कंठ
- (घ) दंतोष्ठ
उत्तर देखें
(घ) व — दंतोष्ठ्य (ऊपर के दाँत और निचला होंठ)।
"ष" किस वर्ग का वर्ण है (उच्चारण-स्थान के अनुसार)?
- (क) तालव्य
- (ख) मूर्धन्य
- (ग) दंत्य
- (घ) कंठ्य
उत्तर देखें
(ख) श तालव्य, ष मूर्धन्य, स दंत्य।
इनमें से महाप्राण व्यंजन कौन-सा है?
- (क) ग
- (ख) ज
- (ग) थ
- (घ) न
उत्तर देखें
(ग) थ — त वर्ग का दूसरा वर्ण; दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण होता है।
इनमें से अघोष व्यंजन कौन-सा है?
- (क) ग
- (ख) द
- (ग) प
- (घ) म
उत्तर देखें
(ग) प — प वर्ग का पहला वर्ण; पहला-दूसरा वर्ण अघोष।
"ह" वर्ण है —
- (क) अल्पप्राण, अघोष
- (ख) महाप्राण, अघोष
- (ग) अल्पप्राण, घोष
- (घ) महाप्राण, घोष
उत्तर देखें
(घ) ह महाप्राण और घोष दोनों है — ऊष्म वर्णों में यह अपवाद है।
"ड़" और "ढ़" किस प्रकार के व्यंजन हैं?
- (क) पार्श्विक
- (ख) उत्क्षिप्त
- (ग) लुंठित
- (घ) नासिक्य
उत्तर देखें
(ख) जीभ झटके से गिरती है — उत्क्षिप्त (द्विगुण); ये शब्द के आरंभ में नहीं आते।
"ल" किस प्रकार का व्यंजन है?
- (क) पार्श्विक
- (ख) लुंठित
- (ग) संघर्षी
- (घ) अर्धस्वर
उत्तर देखें
(क) हवा जीभ के बगल से निकलती है — पार्श्विक।
शुद्ध वर्तनी वाला शब्द चुनिए —
- (क) आर्शीवाद
- (ख) आशीर्वाद
- (ग) आशिर्वाद
- (घ) आर्शिवाद
उत्तर देखें
(ख) आ-शीर्-वाद: रेफ "व" पर लगेगा।
शुद्ध शब्द कौन-सा है?
- (क) कवियत्री
- (ख) कवयत्री
- (ग) कवियित्री
- (घ) कवयित्री
उत्तर देखें
(घ) कवि का स्त्रीलिंग — कवयित्री।
शुद्ध शब्द चुनिए —
- (क) उपरोक्त
- (ख) उपर्युक्त
- (ग) उपरियुक्त
- (घ) ऊपरोक्त
उत्तर देखें
(ख) उपरि + उक्त = उपर्युक्त (यण संधि)।
"इतिहास" से -इक प्रत्यय लगाकर सही विशेषण होगा —
- (क) इतिहासिक
- (ख) एतिहासिक
- (ग) ऐतिहासिक
- (घ) ऐतहासिक
उत्तर देखें
(ग) -इक लगने पर पहला स्वर वृद्धि: इ → ऐ।
मानक वर्तनी के अनुसार सही रूप है —
- (क) उस ने
- (ख) उसने
- (ग) उस-ने
- (घ) उसनें
उत्तर देखें
(ख) सर्वनाम के साथ विभक्ति मिलाकर लिखी जाती है।
शुद्ध शब्द कौन-सा है?
- (क) सशक्तिकरण
- (ख) सशक्तीकरण
- (ग) सशक्तकरण
- (घ) सशक्तीकरन
उत्तर देखें
(ख) "बनाना" के अर्थ में -ईकरण: सशक्त → सशक्तीकरण।
"हंस" और "हँस" में अंतर किस कारण है?
- (क) विसर्ग
- (ख) रेफ
- (ग) हल्
- (घ) अनुस्वार और चंद्रबिंदु
उत्तर देखें
(घ) हंस (पक्षी) में अनुस्वार, हँस (हँसना) में चंद्रबिंदु — अर्थ बदल जाता है।
"वाङ्मय" में ङ् क्यों लिखा जाता है, अनुस्वार क्यों नहीं?
- (क) अगला वर्ण उसी वर्ग का है
- (ख) अगला वर्ण दूसरे वर्ग का है (म)
- (ग) यह तद्भव शब्द है
- (घ) ङ् कभी नहीं बदलता
उत्तर देखें
(ख) पंचमाक्षर के बाद दूसरे वर्ग का वर्ण आए तो पंचमाक्षर ही रहता है (मानक नियम)।
संदर्भ
ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:
- केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी का मानकीकरण (संशोधित संस्करण, 2024): मानक वर्णमाला (अनु. 2) और वर्तनी के नियम (अनु. 3)
- कामताप्रसाद गुरु, संक्षिप्त हिंदी व्याकरण, काशी नागरी प्रचारिणी सभा — वर्णविचार