पत्र 1 · हिंदी भाषा ज्ञान · अध्याय 7
कारक
वाक्य में संज्ञा/सर्वनाम का क्रिया से संबंध। परीक्षा में 'रेखांकित पद में कौन-सा कारक है' और 'को' तथा 'से' वाले भ्रम सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं।
अंतिम अपडेट: 2026-10-14
इस अध्याय में
कारक क्या है
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया (या दूसरे शब्दों) से पता चले, उसे कारक कहते हैं। कारक बताने वाले चिह्नों (ने, को, से, का, में…) को विभक्ति-चिह्न या परसर्ग कहते हैं।
"राम ने बाग में पेड़ से माँ के लिए आम तोड़ा।" — एक ही वाक्य में कई कारक: कर्ता, अधिकरण, अपादान, संप्रदान।
कारक के आठ भेद एक नज़र में
| क्रम | कारक | विभक्ति-चिह्न | अर्थ (किसका बोध) | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कर्ता | ने (कभी चिह्न-रहित) | काम करने वाला | राम ने पत्र लिखा। बच्चा सोता है। |
| 2 | कर्म | को (कभी चिह्न-रहित) | जिस पर काम का फल पड़े | माँ ने बच्चे को सुलाया। वह पुस्तक पढ़ता है। |
| 3 | करण | से, के द्वारा, के साथ | काम का साधन | वह कलम से लिखता है। |
| 4 | संप्रदान | को, के लिए | जिसके लिए काम हो / जिसे कुछ दिया जाए | गरीबों को कपड़े दो। माँ के लिए फल लाओ। |
| 5 | अपादान | से (अलग होने के अर्थ में) | जिससे अलगाव हो | पेड़ से पत्ता गिरा। |
| 6 | संबंध | का, के, की; रा, रे, री; ना, ने, नी | एक संज्ञा का दूसरी से संबंध | यह राम की पुस्तक है। मेरा घर। |
| 7 | अधिकरण | में, पर | काम का आधार (स्थान, समय) | पुस्तक मेज़ पर है। मछली पानी में रहती है। |
| 8 | संबोधन | हे, अरे, अजी, ओ, रे (और !) | किसी को पुकारना | हे प्रभु! रक्षा करो। अरे मोहन! इधर आओ। |
याद रखने का क्रम: "कर्ता-कर्म-करण-संप्रदान-अपादान-संबंध-अधिकरण-संबोधन" — संस्कृत की विभक्तियाँ भी इसी क्रम में हैं: प्रथमा (कर्ता), द्वितीया (कर्म), तृतीया (करण), चतुर्थी (संप्रदान), पंचमी (अपादान), षष्ठी (संबंध), सप्तमी (अधिकरण), संबोधन।
हर कारक विस्तार से
1. कर्ता कारक
- "ने" केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल (सामान्य, आसन्न, पूर्ण, संदिग्ध) में: "सीता ने गीत गाया।" (विस्तार: क्रिया, काल और वाच्य)
- बाकी स्थितियों में कर्ता चिह्न-रहित: "सीता गीत गाती है।"
- कर्ता के साथ "को" (कर्तव्य/आवश्यकता): "मुझको घर जाना है।" "राम को पढ़ना चाहिए।" — यहाँ भी कर्ता कारक।
- कर्ता के साथ "से/द्वारा" (कर्मवाच्य, भाववाच्य): "मुझसे पढ़ा नहीं जाता।" "पुलिस द्वारा चोर पकड़ा गया।" — कर्ता कारक।
2. कर्म कारक
- प्राणिवाचक कर्म के साथ प्रायः "को": "पिता ने पुत्र को बुलाया।"
- अप्राणिवाचक कर्म प्रायः चिह्न-रहित: "वह आम खाता है।"
- द्विकर्मक क्रिया में गौण कर्म के साथ "को": "माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।"
3. करण कारक — साधन
"से", "के द्वारा", "के साथ", "के कारण" — जिस साधन/माध्यम/कारण से काम हो: "चाकू से फल काटो।" "बस से आया।" "भूख से बेहाल है।" (कारण) · "ध्यान से सुनो।" (रीति) · "वह माँ के साथ गया।"
4. संप्रदान कारक — जिसके लिए
"को", "के लिए", "के वास्ते", "हेतु": "भिखारी को भोजन दो।" (देने के अर्थ में "को" = संप्रदान) · "देश के लिए बलिदान।" · "बच्चों को मिठाई अच्छी लगती है।" (रुचना/अच्छा लगना) · "गुरुजी को प्रणाम।" (नमस्कार, प्रणाम)
5. अपादान कारक — अलग होना
"से" जब अलगाव, तुलना, डर, सीखना, उत्पत्ति, लज्जा, दूरी या आरंभ बताए:
| अर्थ | उदाहरण |
|---|---|
| अलगाव | पेड़ से फल गिरा। वह घर से निकला। |
| तुलना | राम श्याम से लंबा है। |
| डर | बच्चा कुत्ते से डरता है। |
| सीखना | छात्र गुरु से सीखते हैं। |
| उत्पत्ति / निकलना | गंगा हिमालय से निकलती है। |
| लज्जा | बहू ससुर से लजाती है। |
| दूरी | राँची दिल्ली से दूर है। |
| समय का आरंभ | वह कल से बीमार है। |
6. संबंध कारक
चिह्न अगले शब्द (संबंधी) के लिंग-वचन के अनुसार बदलता है: "राम का घर", "राम के घर", "राम की पुस्तक"। सर्वनाम में रा/रे/री (मेरा, तेरी, हमारे) और ना/ने/नी (अपना, अपनी)।
7. अधिकरण कारक
"में" (भीतर), "पर" (ऊपर/पास); समय और स्थान दोनों: "कमरे में", "छत पर", "सुबह में", "सोमवार को छुट्टी है।" (समय के अर्थ में "को" = अधिकरण)
8. संबोधन कारक
पुकारने के अर्थ में; शब्द से पहले संबोधन-सूचक अव्यय और बाद में विस्मयादिबोधक चिह्न (!): "हे भगवान!", "बच्चो! शोर मत करो।" (संबोधन में बहुवचन का अनुस्वार हट जाता है: बच्चों → बच्चो)।
"को" का भ्रम: कर्म, संप्रदान या अधिकरण?
| वाक्य | कारक | क्यों |
|---|---|---|
| राम ने मोहन को पीटा। | कर्म | पीटने का फल मोहन पर |
| राम ने मोहन को पुस्तक दी। | संप्रदान | देने के अर्थ में — जिसे दिया गया |
| मुझको जाना है। | कर्ता | जाने का काम मुझे करना है |
| रविवार को छुट्टी है। | अधिकरण | समय का आधार |
| बच्चों को खिलौने अच्छे लगते हैं। | संप्रदान | रुचने के अर्थ में |
"से" का भ्रम: करण या अपादान?
| वाक्य | कारक | क्यों |
|---|---|---|
| वह कलम से लिखता है। | करण | कलम साधन है |
| छत से पानी टपकता है। | अपादान | छत से अलग होकर |
| वह साइकिल से आया। | करण | साइकिल साधन |
| वह साइकिल से गिर गया। | अपादान | साइकिल से अलग हुआ |
| सोना लोहे से महँगा है। | अपादान | तुलना |
| मुझसे यह काम नहीं होगा। | कर्ता | कर्मवाच्य/भाववाच्य में कर्ता |
चिह्न-रहित कारक और अन्य विशेष स्थितियाँ
- कर्ता और कर्म के चिह्न अक्सर लुप्त रहते हैं: "लड़का पत्र लिखता है।" (कर्ता, कर्म — दोनों चिह्न-रहित)
- स्थान वाले कुछ वाक्यों में "को/में" लुप्त: "वह घर गया।" (= घर को — कर्म, या गंतव्य)
- संबंध कारक के चिह्न संयुक्त संबंधबोधक बनाते हैं: के ऊपर, के नीचे, के पास, की ओर — "मेज़ के ऊपर" (अधिकरण का भाव)।
विभक्ति-चिह्न कैसे लिखें
केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक नियम:
- संज्ञा के साथ अलग: राम ने, राम को, घर में, मोहन के लिए।
- सर्वनाम के साथ मिलाकर: उसने, मुझको, तुमसे, उसमें, आपका।
- सर्वनाम के साथ दो चिह्न: पहला मिलाकर, दूसरा अलग — उसके लिए, आपके साथ, मेरे पास।
- बीच में "ही/तक" आए तो अलग: आप ही के लिए, उस तक।
अभ्यास प्रश्न
रेखांकित (मोटे) पद का कारक पहचानिए।
हिंदी व्याकरण में कारक कितने माने जाते हैं?
- (क) 6
- (ख) 7
- (ग) 9
- (घ) 8
उत्तर देखें
(घ) कर्ता से संबोधन तक — आठ।
"राम ने रावण को मारा।"
- (क) कर्ता
- (ख) कर्म
- (ग) करण
- (घ) संबंध
उत्तर देखें
(क) काम करने वाला, "ने" चिह्न।
"माँ ने बच्चे को सुलाया।"
- (क) संप्रदान
- (ख) कर्म
- (ग) अपादान
- (घ) कर्ता
उत्तर देखें
(ख) सुलाने का फल बच्चे पर — कर्म।
"वह चाकू से सब्ज़ी काटती है।"
- (क) अपादान
- (ख) करण
- (ग) अधिकरण
- (घ) संबंध
उत्तर देखें
(ख) चाकू साधन है — करण।
"गरीबों को दान दो।"
- (क) कर्म
- (ख) अधिकरण
- (ग) कर्ता
- (घ) संप्रदान
उत्तर देखें
(घ) देने के अर्थ में — संप्रदान।
"पेड़ से पत्ते गिरते हैं।"
- (क) करण
- (ख) अपादान
- (ग) अधिकरण
- (घ) कर्म
उत्तर देखें
(ख) अलगाव — अपादान।
"राम श्याम से होशियार है।"
- (क) करण
- (ख) अपादान
- (ग) संबंध
- (घ) कर्ता
उत्तर देखें
(ख) तुलना — अपादान।
"बच्चा शेर से डरता है।"
- (क) करण
- (ख) कर्म
- (ग) अपादान
- (घ) संप्रदान
उत्तर देखें
(ग) डर के अर्थ में — अपादान।
"यह मोहन की किताब है।"
- (क) अधिकरण
- (ख) कर्ता
- (ग) संप्रदान
- (घ) संबंध
उत्तर देखें
(घ) किताब का मोहन से संबंध।
"चिड़िया पेड़ पर बैठी है।"
- (क) अपादान
- (ख) संबंध
- (ग) अधिकरण
- (घ) कर्म
उत्तर देखें
(ग) आधार (स्थान) — अधिकरण।
"रविवार को विद्यालय बंद रहता है।"
- (क) कर्म
- (ख) संप्रदान
- (ग) अधिकरण
- (घ) कर्ता
उत्तर देखें
(ग) समय के अर्थ में "को" — अधिकरण।
"हे ईश्वर! दया करो।"
- (क) कर्ता
- (ख) संबोधन
- (ग) संबंध
- (घ) कर्म
उत्तर देखें
(ख) पुकार — संबोधन।
"मुझसे चला नहीं जाता।"
- (क) करण
- (ख) अपादान
- (ग) अधिकरण
- (घ) कर्ता
उत्तर देखें
(घ) भाववाच्य में "से" के साथ कर्ता।
"मुझको दिल्ली जाना है।"
- (क) कर्म
- (ख) संप्रदान
- (ग) कर्ता
- (घ) अधिकरण
उत्तर देखें
(ग) आवश्यकता के अर्थ में "को" के साथ कर्ता।
"वह बस से उतरा।"
- (क) करण
- (ख) अपादान
- (ग) अधिकरण
- (घ) कर्म
उत्तर देखें
(ख) बस से अलग हुआ — अपादान।
"वह बस से राँची गया।"
- (क) करण
- (ख) अपादान
- (ग) अधिकरण
- (घ) संप्रदान
उत्तर देखें
(क) बस साधन — करण।
"गंगा हिमालय से निकलती है।"
- (क) करण
- (ख) अधिकरण
- (ग) संबंध
- (घ) अपादान
उत्तर देखें
(घ) उत्पत्ति/निकलना — अपादान।
"संप्रदान" कारक का चिह्न है —
- (क) से
- (ख) में
- (ग) के लिए
- (घ) का
उत्तर देखें
(ग) को, के लिए — संप्रदान।
संस्कृत की "पंचमी" विभक्ति किस कारक की है?
- (क) करण
- (ख) संप्रदान
- (ग) अपादान
- (घ) अधिकरण
उत्तर देखें
(ग) प्रथमा से सप्तमी: कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण।
मानक वर्तनी के अनुसार शुद्ध रूप कौन-सा है?
- (क) उस ने
- (ख) उसने
- (ग) राम ने
- (घ) दोनों (ख) और (ग)
उत्तर देखें
(घ) सर्वनाम के साथ मिलाकर (उसने), संज्ञा के साथ अलग (राम ने)।
संदर्भ
ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:
- कामताप्रसाद गुरु, संक्षिप्त हिंदी व्याकरण, काशी नागरी प्रचारिणी सभा — कर्ता का विवेचन
- केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी का मानकीकरण (2024), अनु. 3: विभक्ति-चिह्न (परसर्ग) लेखन