पत्र 1 · हिंदी भाषा ज्ञान · अध्याय 8
लिंग और वचन
शब्द पुरुष-जाति का है या स्त्री-जाति का, और एक का बोध कराता है या अनेक का। परीक्षा में 'शुद्ध लिंग वाला वाक्य', 'स्त्रीलिंग रूप' और 'बहुवचन रूप' सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं।
अंतिम अपडेट: 2026-10-14
इस अध्याय में
लिंग क्या है
संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष जाति या स्त्री जाति का होने का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं। हिंदी में दो लिंग हैं: पुल्लिंग (लड़का, घोड़ा, पहाड़) और स्त्रीलिंग (लड़की, घोड़ी, नदी)। संस्कृत में तीसरा लिंग नपुंसक भी है, पर हिंदी में नहीं।
पुल्लिंग पहचानने के नियम
| वर्ग | उदाहरण | अपवाद |
|---|---|---|
| पर्वतों के नाम | हिमालय, विंध्याचल, पारसनाथ, आल्प्स | |
| सागर/महासागर | हिंद महासागर, अरब सागर | |
| देशों के नाम | भारत, जापान, नेपाल, चीन | |
| ग्रहों के नाम | सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, शनि | पृथ्वी (स्त्रीलिंग) |
| दिनों के नाम | सोमवार, मंगलवार, रविवार | |
| महीनों के नाम | चैत, वैशाख, जनवरी, मार्च | |
| धातुएँ | सोना, लोहा, ताँबा, पीतल | चाँदी (स्त्रीलिंग) |
| रत्न | हीरा, मोती, पन्ना, नीलम | मणि (स्त्रीलिंग) |
| द्रव पदार्थ | पानी, दूध, घी, तेल, दही, शरबत | चाय, लस्सी, कॉफ़ी (स्त्रीलिंग) |
| अनाज | गेहूँ, चावल, चना, जौ, बाजरा | मक्की, ज्वार, अरहर, मूँग (स्त्रीलिंग) |
| पेड़ | पीपल, बरगद, आम, नीम, शीशम | इमली (स्त्रीलिंग) |
| शरीर के कुछ अंग | सिर, हाथ, पैर, कान, गला, दाँत, बाल | आँख, नाक, जीभ, गर्दन, उँगली (स्त्रीलिंग) |
प्रत्यय से: -त्व (महत्त्व), -पन (बचपन), -पा (बुढ़ापा), -आव (बहाव), -आवा (बुलावा), -खाना (डाकखाना), -दान (कलमदान), -आर (सुनार) वाले शब्द प्रायः पुल्लिंग।
स्त्रीलिंग पहचानने के नियम
| वर्ग | उदाहरण | अपवाद |
|---|---|---|
| नदियों के नाम | गंगा, यमुना, स्वर्णरेखा, कोयल (नदी) | सिंधु, ब्रह्मपुत्र, दामोदर, सोन (पुल्लिंग — नद) |
| भाषाएँ और बोलियाँ | हिंदी, अंग्रेज़ी, कुरमाली, संथाली, खोरठा | |
| लिपियाँ | देवनागरी, रोमन, ओलचिकी | |
| तिथियाँ | प्रतिपदा, पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी | |
| नक्षत्र | अश्विनी, रोहिणी, भरणी | |
| खाने-पीने की कुछ चीज़ें | रोटी, दाल, सब्ज़ी, खीर, पूड़ी, चाय | भात, हलवा, पराठा (पुल्लिंग) |
प्रत्यय से: -ता (सुंदरता), -आई (लड़ाई), -आवट (सजावट), -आहट (घबराहट), -ति (गति), -इया (डिबिया), -ई (गरमी, हँसी), -नी (चटनी), -आस (मिठास), -इमा (लालिमा) वाले शब्द प्रायः स्त्रीलिंग।
भ्रम वाले शब्द
ये शब्द सबसे ज़्यादा गलत प्रयोग होते हैं और परीक्षा में बार-बार आते हैं:
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| दही, घी, पानी, मोती, हाथी, आदमी, सिर, पंख, पहाड़, पलंग, ताला, शरीर, प्राण, विद्यालय, मकान, देश, नाम, नमक, अचार, कपड़ा, चावल, समाचार, शहद, आँसू, बादल, पुरस्कार, अपराध, अनुरोध, आशीर्वाद, उपहार, कंबल, गुलाब, जूता, दर्शन, प्रश्न, यत्न, विचार, स्वागत, संदेश, हस्ताक्षर, होश | आत्मा, आयु, वायु, ओस, शपथ, विनय, दृष्टि, सामग्री, चर्चा, पुस्तक, कलम, सड़क, सरकार, जनता, मृत्यु, आँख, आवाज़, गेंद, बर्फ़, चाय, मेज़, कुर्सी, आग, हवा, बात, चाँदी, राह, सलाह, सौगंध, तलवार, वर्षा, ईंट, क़सम, मूँछ, साँस, धूप, छाया, लहर, खोज, जीत, हार (पराजय), देह, नींव |
नित्य पुल्लिंग और नित्य स्त्रीलिंग
कुछ प्राणिवाचक शब्द हमेशा एक ही लिंग में रहते हैं; दूसरा लिंग बताने के लिए आगे "नर" या "मादा" लगाते हैं:
| नित्य पुल्लिंग | नित्य स्त्रीलिंग |
|---|---|
| मच्छर, खटमल, कौआ, उल्लू, गीदड़, भेड़िया, चीता, खरगोश, जिराफ़, बाज़ — "मादा मच्छर" | मक्खी, कोयल, मछली, छिपकली, मैना, गिलहरी, तितली, चील, दीमक — "नर मक्खी" |
लिंग परिवर्तन (पुल्लिंग → स्त्रीलिंग)
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| -आ → -ई | लड़का → लड़की, घोड़ा → घोड़ी, नाना → नानी, बेटा → बेटी, मामा → मामी |
| अंत में -ई जोड़कर | देव → देवी, पुत्र → पुत्री, ब्राह्मण → ब्राह्मणी, हिरन → हिरनी |
| -इया | बूढ़ा → बुढ़िया, चूहा → चुहिया, कुत्ता → कुतिया, बेटा → बिटिया, डिब्बा → डिबिया |
| -इन | धोबी → धोबिन, माली → मालिन, सुनार → सुनारिन, नाग → नागिन, बाघ → बाघिन |
| -नी | शेर → शेरनी, मोर → मोरनी, ऊँट → ऊँटनी, जाट → जाटनी |
| -आनी | सेठ → सेठानी, देवर → देवरानी, नौकर → नौकरानी, जेठ → जेठानी, इंद्र → इंद्राणी, भव → भवानी |
| -आइन | पंडित → पंडिताइन, ठाकुर → ठकुराइन, चौबे → चौबाइन, बाबू → बबुआइन |
| -आ (तत्सम) | छात्र → छात्रा, बाल → बाला, सुत → सुता, प्रिय → प्रिया, शिष्य → शिष्या, आचार्य → आचार्या |
| -अक → -इका | लेखक → लेखिका, गायक → गायिका, बालक → बालिका, अध्यापक → अध्यापिका, पाठक → पाठिका, सेवक → सेविका |
| -वान → -वती, -मान → -मती | भगवान → भगवती, गुणवान → गुणवती, श्रीमान → श्रीमती, बुद्धिमान → बुद्धिमती |
| -ता → -त्री | दाता → दात्री, नेता → नेत्री, धाता → धात्री, अभिनेता → अभिनेत्री, कवि → कवयित्री |
| बिल्कुल अलग शब्द | पिता → माता, राजा → रानी, पुरुष → स्त्री, भाई → बहन, ससुर → सास, वर → वधू, साधु → साध्वी, विद्वान → विदुषी, सम्राट → सम्राज्ञी, नर → नारी, बैल → गाय, युवक → युवती, बादशाह → बेगम, मर्द → औरत, बिलाव → बिल्ली |
वचन क्या है
संज्ञा के जिस रूप से एक या अनेक का बोध हो, उसे वचन कहते हैं। हिंदी में दो वचन हैं: एकवचन (लड़का, किताब) और बहुवचन (लड़के, किताबें)। संस्कृत में द्विवचन भी है, हिंदी में नहीं।
बहुवचन बनाने के नियम
विभक्ति-रहित (मूल) रूप
| शब्द का प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| आकारांत पुल्लिंग | आ → ए | लड़का → लड़के, कमरा → कमरे, बेटा → बेटे, घोड़ा → घोड़े |
| अन्य पुल्लिंग | कोई परिवर्तन नहीं | बालक → बालक, घर → घर, हाथी → हाथी, साधु → साधु |
| अकारांत स्त्रीलिंग | अंत में एँ | बहन → बहनें, बात → बातें, पुस्तक → पुस्तकें, आँख → आँखें |
| इ/ई-कारांत स्त्रीलिंग | इयाँ | लड़की → लड़कियाँ, नदी → नदियाँ, रीति → रीतियाँ, तिथि → तिथियाँ |
| या-अंत स्त्रीलिंग | चंद्रबिंदु लगाकर याँ | चिड़िया → चिड़ियाँ, गुड़िया → गुड़ियाँ, बुढ़िया → बुढ़ियाँ |
| आ/उ/ऊ/औ-अंत स्त्रीलिंग | एँ | माता → माताएँ, कथा → कथाएँ, वस्तु → वस्तुएँ, बहू → बहुएँ, गौ → गौएँ |
विभक्ति-सहित (तिर्यक) रूप
बहुवचन में विभक्ति लगने पर: -ओं (लड़कों को, घरों में, बहनों से, माताओं का) और इ/ई-अंत में -यों (लड़कियों को, नदियों में)। संबोधन में अनुस्वार हट जाता है: "बच्चो!", "भाइयो और बहनो!"
समूहवाचक शब्द जोड़कर
गण (छात्रगण, अध्यापकगण), वर्ग (पाठकवर्ग), जन (गुरुजन, बंधुजन), लोग (आप लोग), वृंद (मित्रवृंद), दल (सेनादल), समूह (जनसमूह)। ध्यान दें: इनके साथ शब्द को बहुवचन में नहीं बदलते — "छात्रगण" (छात्रोंगण नहीं)।
सदा एकवचन, सदा बहुवचन और आदरार्थ
| वर्ग | शब्द |
|---|---|
| सदा एकवचन (द्रव्य, भाव, समूह) | जनता, पानी, दूध, घी, सोना, आकाश, प्रेम, क्रोध, सत्य, भीड़, सामान, वर्षा — "जनता नाराज़ है" (हैं नहीं) |
| सदा बहुवचन | प्राण, होश, दर्शन, हस्ताक्षर, आँसू, लोग, समाचार — "उसके प्राण निकल गए", "आपके दर्शन हुए" |
| आदरार्थ बहुवचन | आदरणीय व्यक्ति के लिए एकवचन संज्ञा के साथ बहुवचन क्रिया: "पिताजी आए हैं।", "गुरुजी पढ़ा रहे हैं।", "प्रधानमंत्री बोले।" |
| अहंकार/बड़प्पन में | "हम" एक व्यक्ति के लिए: "हम कल आएँगे" (वक्ता अकेला) |
अभ्यास प्रश्न
उत्तर देखने के लिए "उत्तर देखें" पर टैप करें।
हिंदी में कितने लिंग होते हैं?
- (क) एक
- (ख) दो
- (ग) तीन
- (घ) चार
उत्तर देखें
(ख) पुल्लिंग और स्त्रीलिंग; नपुंसक लिंग संस्कृत में है।
इनमें से पुल्लिंग शब्द कौन-सा है?
- (क) ओस
- (ख) चाय
- (ग) आत्मा
- (घ) दही
उत्तर देखें
(घ) "दही खट्टा है" — पुल्लिंग। बाकी स्त्रीलिंग।
इनमें से स्त्रीलिंग शब्द कौन-सा है?
- (क) आयु
- (ख) मोती
- (ग) पानी
- (घ) सिर
उत्तर देखें
(क) "लंबी आयु" — स्त्रीलिंग।
ग्रहों के नाम पुल्लिंग होते हैं; इसका अपवाद है —
- (क) मंगल
- (ख) शनि
- (ग) पृथ्वी
- (घ) बुध
उत्तर देखें
(ग) पृथ्वी स्त्रीलिंग है।
इनमें से किस नदी का नाम पुल्लिंग है?
- (क) गंगा
- (ख) यमुना
- (ग) ब्रह्मपुत्र
- (घ) कावेरी
उत्तर देखें
(ग) ब्रह्मपुत्र, सिंधु, दामोदर, सोन — नद (पुल्लिंग)।
"मक्खी" किस प्रकार का शब्द है?
- (क) नित्य पुल्लिंग
- (ख) नपुंसक
- (ग) उभयलिंगी
- (घ) नित्य स्त्रीलिंग
उत्तर देखें
(घ) सदा स्त्रीलिंग; पुरुष जाति के लिए "नर मक्खी"।
"कवि" का स्त्रीलिंग है —
- (क) कवयित्री
- (ख) कवियित्री
- (ग) कवियत्री
- (घ) कविनी
उत्तर देखें
(क) कवयित्री।
"विद्वान" का स्त्रीलिंग है —
- (क) विद्वानी
- (ख) विदुषी
- (ग) विद्वती
- (घ) विद्यावती
उत्तर देखें
(ख) विदुषी।
"सम्राट" का स्त्रीलिंग रूप है —
- (क) सम्राटनी
- (ख) सम्राज्ञी
- (ग) साम्राज्ञी
- (घ) सम्राटी
उत्तर देखें
(ख) सम्राज्ञी।
"लेखक" का स्त्रीलिंग है —
- (क) लेखकनी
- (ख) लेखिकी
- (ग) लेखनी
- (घ) लेखिका
उत्तर देखें
(घ) -अक → -इका।
"श्रीमान" का स्त्रीलिंग है —
- (क) श्रीमती
- (ख) श्रीमानी
- (ग) श्रीवती
- (घ) श्रीमतिनी
उत्तर देखें
(क) -मान → -मती।
"हार" शब्द "पराजय" के अर्थ में किस लिंग में है?
- (क) पुल्लिंग
- (ख) स्त्रीलिंग
- (ग) दोनों
- (घ) कोई नहीं
उत्तर देखें
(ख) "उसकी हार हुई" — स्त्रीलिंग; माला के अर्थ में पुल्लिंग।
हिंदी में वचन कितने हैं?
- (क) एक
- (ख) दो
- (ग) तीन
- (घ) चार
उत्तर देखें
(ख) एकवचन और बहुवचन; द्विवचन संस्कृत में।
"लड़की" का बहुवचन है —
- (क) लड़कीएँ
- (ख) लड़कीयाँ
- (ग) लड़कियां
- (घ) लड़कियाँ
उत्तर देखें
(घ) ई-कारांत स्त्रीलिंग → इयाँ (चंद्रबिंदु सहित)।
"वस्तु" का बहुवचन है —
- (क) वस्तुएँ
- (ख) वस्तुयें
- (ग) वस्तुओं
- (घ) वस्तुयाँ
उत्तर देखें
(क) उ-कारांत स्त्रीलिंग → एँ।
इनमें से कौन-सा शब्द बहुवचन में नहीं बदलता?
- (क) लड़का
- (ख) कमरा
- (ग) राजा
- (घ) घोड़ा
उत्तर देखें
(ग) संस्कृत के संबंध/पदवाचक आकारांत पुल्लिंग (राजा, पिता, देवता) नहीं बदलते।
इनमें से सदा बहुवचन में प्रयुक्त शब्द है —
- (क) जनता
- (ख) प्राण
- (ग) पानी
- (घ) भीड़
उत्तर देखें
(ख) "प्राण निकल गए" — सदा बहुवचन।
शुद्ध वाक्य कौन-सा है?
- (क) जनता नाराज़ हैं।
- (ख) जनता नाराज़ हो गईं।
- (ग) जनताएँ नाराज़ है।
- (घ) जनता नाराज़ है।
उत्तर देखें
(घ) "जनता" सदा एकवचन।
"पिताजी कल आए थे।" में बहुवचन क्रिया का कारण है —
- (क) पिता बहुत हैं
- (ख) आदर
- (ग) व्याकरण की गलती
- (घ) भूतकाल
उत्तर देखें
(ख) आदरार्थ बहुवचन।
संबोधन में "बच्चों" का शुद्ध रूप है —
- (क) बच्चों!
- (ख) बच्चो!
- (ग) बच्चे!
- (घ) बच्चें!
उत्तर देखें
(ख) संबोधन बहुवचन में अनुस्वार हट जाता है।