पत्र 2 · जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (कुरमाली) · अध्याय 6
कुरमाली अव्यय और समास (तामान, एकुन)
कुरमाली · कुड़माली · Kurmali · Kudmali
जिन शब्दों का रूप कभी नहीं बदलता (तामान), और दो या अधिक शब्दों के मेल से बना नया शब्द (एकुन)। दोनों में उदाहरण पहचानने के प्रश्न सबसे अधिक आते हैं।
अंतिम अपडेट: 2026-10-14
इस अध्याय में
अव्यय (तामान) के 4 भेद
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन (लेखा), पुरुष (झन) या कारक (परिक) के कारण नहीं बदलता, उन्हें अव्यय (तामान) कहते हैं।
| # | हिंदी | कुरमाली | English |
|---|---|---|---|
| 1 | क्रियाविशेषण | गुनिन सरान | Adverb |
| 2 | संबंधबोधक | नाता बाचिक | Preposition |
| 3 | समुच्चयबोधक | जड़न बाचिक | Conjunction |
| 4 | विस्मयादिबोधक | बधान बाचिक | Interjection |
क्रियाविशेषण (गुनिन सरान)
जो अव्यय क्रिया की विशेषता बताए: आसते-आसते, चाँड़े, आचकाइ, तऽ। ग्रंथ में इसके तीन आधार हैं:
1. रूप के अनुसार (गढ़नेक अनुजाइं)
| भेद | कुरमाली नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| मूल | गड़ा गुनिन सरान | फेइर, आचाकाइ, बेस, तऽ |
| यौगिक | जड़ान गुनिन सरान | भूले-भूले, आसे-पासे, आसते-आसते, ताड़ातेइड़, एकाइं-एकाइं, बेजाने, हरहर, हड़हड़, खपट-खपट |
| स्थानीय | थानिन गुनिन सरान | रूप बदले बिना खास जगह प्रयोग: तोंय कपाड़ पढ़बे। काम नि करबे तऽ तोंय लुआइठ खाबे। |
2. प्रयोग के अनुसार (बेबहारेक अनुजाइं)
| भेद | कुरमाली नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| साधारण | मटामटि | ओंय बेसी कहेइस। छवासभ हुंदे गेला। मोंय कँदे जाम? — वह ज़्यादा बोलता है। लड़के उधर गए। मैं कहाँ जाऊँगा? |
| संयोजक | जड़नदार | जखन तोंय आवबे तखन मोंय जाम। — जब तुम आओगे तब मैं जाऊँगा। |
| अनुबद्ध | सटीक / ठउका | मोंय एखन तड़िक नि खाल आहों। — मैंने अभी तक नहीं खाया है। |
3. अर्थ के अनुसार (भाभेक अनुजाइं) — 4 भेद
| भेद | कुरमाली नाम | उप-भेद और उदाहरण |
|---|---|---|
| स्थानवाचक | थानबाची | स्थिति (जमक बाची): हियाँ, हुआँ, बाहेइर, भीतर, आगुइं, पेछुइं, उपर, धूर, आगुबाटे; दिशा (दिकबाची): हिंदे-हुंदे, कँदे, जँदे, बाँउएँ, देहिने, चाइरोगिरदा |
| कालवाचक | बेरा बाची | समय (बेराबाची): आइज, काइल, जबे, पहिल, एखन, चाँड़े, कबऊ, आखिर, तबे, परसु; अवधि (सतखनबाची): रजे, सतखन, दिन-भइर, लागातार; बार-बार: पेतिदिन, केतेकबार, खने-खने, घड़ी-घड़ी |
| रीतिवाचक | रित / दस्तुर बाची | 7 उप-भेद: रकमबाची एसे, असे, जेसे, तेसे, आचाकाइ; निश्चय सांचाइ, निसटाइ, जरूड़; अनिश्चय केजान, हेइपारेक, बधइ; स्वीकार हाँ, ठीक; कारण काहे, सेइतेहें, सेइलाइ; निषेध नि, नेहि, ना, ठेपो; अवधारण एतने, तड़िक, ताव/ताउ |
| परिमाणवाचक | जखान बाची | 5 उप-भेद: अधिकता बेजाइं, बेसी, बड़ऽ, भारी, एकदम, दमे; कमी रिचिक, किछु, टुकु; पर्याप्त आबगा, ठउका, ठीक; तुलना एतेक, अतेक, कम, बेसी; श्रेणी रिचिक-रिचिक, एकाइं-एकाइं, बूंदे-बूंदे |
संबंधबोधक (नाता बाचिक)
जो अव्यय संज्ञा के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्द से जोड़े: असद बिनु बेजरिया मरलाक। छाइनेक उपरे कउआ बसल आहे। गांव तड़िक जाइं।
प्रयोग के अनुसार: सम्बद्ध — संज्ञा के चिह्न के बाद (टाकाक बिनु काम नि हेइक); अनुबद्ध (बेगढ़हान) — संज्ञा के बदले रूप के साथ (बछर तड़िक रहल। छवा संग चली गेल। दिन भइर …)।
अर्थ के अनुसार 13 भेद
| भेद | उदाहरण |
|---|---|
| कालवाचक | आगु, पेछु, पहिल, बादे, परे |
| दिशावाचक | बाटे, पाइर, इपाइर-उपाइर, आसे-पासे, चाइरो गिरदा |
| साधनवाचक | दारा, तेहें |
| कारणवाचक | कारन, हाँतिर, खातिर, जइने, तेहें |
| विषयवाचक | लेखे, बाबत |
| स्थानवाचक | हेंठे, ठांऊँ, पासे, बाहेइर |
| व्यतिरेकवाचक | छाड़ीके, बिनु |
| विनिमयवाचक | अउजि, पालटि, जाइगाइं |
| सादृश्यवाचक | नियार / निआर, बराबइर, समान, लेखे |
| विरोधवाचक | उलटा |
| सहचरवाचक | संग, अधीन |
| संग्रहवाचक | तक, भइर, आबगा |
| तुलनावाचक | ले, आगुइं, मुहामुही |
व्युत्पत्ति के अनुसार: मूल (गड़ा नाता बाचिक) — तक, बिनु, तड़िक; यौगिक (जड़ान नाता बाचिक) — सेइतेहें।
समुच्चयबोधक (जड़न बाचिक)
जो शब्द दो वाक्यों या शब्दों को जोड़े: अघनु गेल आर फागु आवल। मेघु आर जेठु हाट जाहात। (आर = और)
| भेद | उप-भेद | उदाहरण |
|---|---|---|
| समानाधिकरण (जड़ानु जड़न बाचिक) | संयोजक (जड़ेइया) | आर, एबंग, जे |
| वियोजक (बे जड़ेइया) | बा, न, किंबा, चाहे, नितऽ — न चइता आवल न जेठु | |
| विरोधदर्शक (टंठालु जड़न बाची) | मनेक, मनतुक, बरंच (लेकिन, परंतु) | |
| परिणामदर्शक | सेइतेहें — बेइरसा नि हेलेइक सेइतेहें धरन करलेइक | |
| व्याधिकरण (दर जड़ानु जड़ान बाचिक) | कारणवाचक | काहेकि, कारन, सेइमाहान, सेइतेहें |
| उद्देश्यवाचक (धेइ बाचिक) | कि, जेइं, लाइ | |
| संकेतवाचक | जदि, तऽ, चाहे | |
| स्वरूपवाचक (गढ़न बाचिक) | जे, माने |
विस्मयादिबोधक (बधान बाचिक)
हर्ष, दुःख, घृणा, डर आदि भाव प्रकट करने वाले शब्द।
| भाव | कुरमाली नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| हर्ष / प्रशंसा | रीझ बाचिक | बाह! साबाइस! बेस! |
| दुःख | सँताप बाचिक | हाय-हाय, हायरे, बापगो, माइगो, अहोरे |
| आश्चर्य | अबाक बाचिक | हें! किना! |
| स्वीकृति | सिंकार बाचिक | ठीक, आछा, हँ |
| घृणा | घिन बाचिक | छि-छि, धेइत, हेइट, धेइततेरी |
| संबोधन / पुकार | हाकान बाचिक | एरे, एहो, अरे |
समास (एकुन)
जब दो या अधिक शब्द अपने चिह्न छोड़कर एक हो जाते हैं और एक स्वतंत्र शब्द बनाते हैं, तो उसे समास (एकुन) कहते हैं। ग्रंथ पं. किशोरीदास वाजपेयी की परिभाषा का आधार लेता है।
समास के भेद
| समास | कुरमाली नाम | पहचान | उदाहरण (ग्रंथ से) |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | तामानि एकुन | पहला शब्द अव्यय; पूरा शब्द क्रियाविशेषण जैसा | भइरपेट, बेयाराम, डेगे-डेगे, घार-घार, पेतिदिन, नित-नित, मने-मने, रसे-रसे, बछर-बछर, बेसुमार, अनचिनहा, आन-आन |
| तत्पुरुष | दासा एकुन | बाद वाले शब्द का अर्थ प्रधान | नीचे देखें |
| कर्मधारय | करनिधारेइ एकुन | एक संज्ञा + एक विशेषण, या दोनों संज्ञा पर विशेषण-विशेष्य जैसा संबंध | लीलकमल, चांदबदन, जादुमनि, महाजन, गेरूमाटी, बाछाधन, कायराकुकुर, पटरानी |
| द्विगु | लेखा एकुन | पहला पद संख्यावाचक | ग्रंथ में इस भेद का अलग उदाहरण नहीं मिला |
| द्वंद्व | रंद एकुन | दोनों पद प्रधान; बीच का आर (और) छिपा | कांटा-खंचा, तेल-सिंदूर, दीया-बाती, नून-तेल, दाइल-भात, राइत-दिन, बेचा-किना, आसा-जावा, हिसाब-किताब, हांड़ी-कुंड़ी, दया-धरम, मायं-बाप, छवा-पुता, मरन-जियन |
| बहुव्रीहि | खामिद एकुन | कोई पद प्रधान नहीं; पूरा शब्द किसी तीसरे का विशेषण | चिरूनदांती, बांदरमुंहा, पड़लमुंहा, तेलाइपेटा, बिलाइ आंखिया, सोनामुंहा, बूढ़ाबाबा |
| नञ् तत्पुरुष | — | पहले अ, न, अन, ना (निषेध) | निठुर, अभागा, अधरम, अचेठा, नापाता, अनचिनहा, अनठेकान, अबुझ |
तत्पुरुष (दासा एकुन) के भेद
पहले पद का कारक-चिह्न समास बनते समय लुप्त हो जाता है।
| भेद | कुरमाली नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्म तत्पुरुष | — | काठ-खटकी, मुड़काटा, पगरीढाहा, काठकाटा, धानकुटा, लुगाकाचा, गाड़वान, भातरांधा |
| करण तत्पुरुष | दाराइज दासा एकुन | ढेंकीछांटा, दिसाहारा, नींदमतुवा |
| सम्प्रदान तत्पुरुष | दानिन दासा एकुन | कानपासा, गोहाइल, रांधाघार, पंचायतघार |
| अपादान तत्पुरुष | बेलग दासा एकुन | जनमकाना, गाछगिरवा, घारछाड़ा, गांवछाड़ा |
| संबंध तत्पुरुष | नाता दासा एकुन | राजाघार, जनमभूंइ, दुनियाघार, बांदरनाच, तालगाछ, बनदेवी, महुआ-लाठा, राजकुंवर |
| अधिकरण तत्पुरुष | ठेधान दासा एकुन | गाछपाका, घारघुसड़ा, आपजांची |
अन्य एकुन
| समास | कुरमाली नाम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अलुक् तत्पुरुष | अलुक् दासा एकुन | पहले शब्द का चिह्न लुप्त नहीं होता | गाछपाका, हाथकाटा, राइतचरा |
| नञ् तत्पुरुष | नञ् दासा एकुन | अ, न, अन, ना से निषेध | निठुर, अभागा, अधरम, अनचिनहा, अबुझ |
| मध्यपदलोपी | लुकानिपद एकुन | बीच के शब्द छिप जाते हैं | गरूगाड़ी, तेलाइपेटा, कालमुहा, घारजावाइं, दूधदेलभात, पातपड़ापीठा |
| प्रादि | टुकु जुमक / पेंउदा एकुन | पहला पद उपसर्ग: सु, नि, उ, आध, दर, अ, बा, आ, बे, बि | सुघड़, निझूम, उरिन, आधमरा, आधपाका, दरफाड़ा, दरसीझा, अपांइत, बाथान, बेढप, बेदार, बिजड़ |
पारिभाषिक शब्दावली
| हिंदी | कुरमाली | English |
|---|---|---|
| अव्यय | तामान | Indeclinable |
| क्रियाविशेषण | गुनिन सरान | Adverb |
| संबंधबोधक | नाता बाचिक | Preposition / Postposition |
| समुच्चयबोधक | जड़न बाचिक | Conjunction |
| विस्मयादिबोधक | बधान बाचिक | Interjection |
| समास | एकुन | Compound |
| अव्ययीभाव | तामानि एकुन | Adverbial compound |
| तत्पुरुष | दासा एकुन | Determinative compound |
| कर्मधारय | करनिधारेइ एकुन | Appositional compound |
| द्विगु | लेखा एकुन | Numeral compound |
| द्वंद्व | रंद एकुन | Copulative compound |
| बहुव्रीहि | खामिद एकुन | Attributive compound |
अभ्यास प्रश्न
कुरमाली में अव्यय को क्या कहते हैं?
- (क) गुनिन
- (ख) तामान
- (ग) सरान
- (घ) एकुन
उत्तर देखें
(ख) तामान = अव्यय।
क्रियाविशेषण का कुरमाली नाम है —
- (क) गुनिन सरान
- (ख) गुनिन
- (ग) नाता बाचिक
- (घ) जड़न बाचिक
उत्तर देखें
(क) क्रिया का गुनिन।
"जड़न बाचिक" किस अव्यय का नाम है?
- (क) संबंधबोधक
- (ख) क्रियाविशेषण
- (ग) विस्मयादिबोधक
- (घ) समुच्चयबोधक
उत्तर देखें
(घ) जोड़ने वाला।
"बाह! साबाइस!" किस भाव के विस्मयादिबोधक हैं?
- (क) घिन (घृणा)
- (ख) सँताप (दुःख)
- (ग) रीझ (हर्ष/प्रशंसा)
- (घ) अबाक (आश्चर्य)
उत्तर देखें
(ग) रीझ बाचिक।
"हाय-हाय, बापगो, माइगो" किस बाचिक के उदाहरण हैं?
- (क) रीझ
- (ख) सँताप (दुःख)
- (ग) सिंकार
- (घ) हाकान
उत्तर देखें
(ख) दुःख।
"आइज, काइल, परसु" किस प्रकार के क्रियाविशेषण हैं?
- (क) कालवाचक
- (ख) स्थानवाचक
- (ग) रीतिवाचक
- (घ) परिमाणवाचक
उत्तर देखें
(क) आज, कल, परसों।
"हियाँ, हुआँ, भीतर, बाहेइर" किस क्रियाविशेषण के उदाहरण हैं?
- (क) रीतिवाचक
- (ख) कालवाचक
- (ग) परिमाणवाचक
- (घ) स्थानवाचक (जमक बाची)
उत्तर देखें
(घ) यहाँ, वहाँ, अंदर, बाहर।
"बिनु, तक, तड़िक" किस वर्ग के अव्यय हैं?
- (क) विस्मयादिबोधक
- (ख) समुच्चयबोधक
- (ग) मूल संबंधबोधक (गड़ा नाता बाचिक)
- (घ) परिमाणवाचक
उत्तर देखें
(ग) व्युत्पत्ति से मूल नाता बाचिक।
विरोधदर्शक समुच्चयबोधक का उदाहरण है —
- (क) आर
- (ख) मनतुक
- (ग) जदि
- (घ) काहेकि
उत्तर देखें
(ख) मनेक, मनतुक, बरंच = लेकिन/परंतु।
संकेतवाचक समुच्चयबोधक है —
- (क) जदि
- (ख) आर
- (ग) बा
- (घ) कारन
उत्तर देखें
(क) जदि = यदि।
समास को कुरमाली में क्या कहते हैं?
- (क) जड़न
- (ख) रंद
- (ग) दासा
- (घ) एकुन
उत्तर देखें
(घ) एकुन = समास।
"दासा एकुन" किस समास का नाम है?
- (क) द्वंद्व
- (ख) बहुव्रीहि
- (ग) तत्पुरुष
- (घ) अव्ययीभाव
उत्तर देखें
(ग) तत्पुरुष।
"खामिद एकुन" किस समास का नाम है?
- (क) कर्मधारय
- (ख) बहुव्रीहि
- (ग) द्विगु
- (घ) अव्ययीभाव
उत्तर देखें
(ख) बहुव्रीहि।
"दाइल-भात, राइत-दिन, मायं-बाप" किस समास के उदाहरण हैं?
- (क) द्वंद्व (रंद एकुन)
- (ख) तत्पुरुष
- (ग) अव्ययीभाव
- (घ) कर्मधारय
उत्तर देखें
(क) बीच में "आर" छिपा।
"भइरपेट, घार-घार, पेतिदिन" किस समास के उदाहरण हैं?
- (क) तत्पुरुष
- (ख) द्वंद्व
- (ग) बहुव्रीहि
- (घ) अव्ययीभाव (तामानि एकुन)
उत्तर देखें
(घ) पहला पद अव्यय/पुनरुक्त, क्रियाविशेषण जैसा।
"लीलकमल, चांदबदन, पटरानी" किस समास के उदाहरण हैं?
- (क) द्वंद्व
- (ख) द्विगु
- (ग) कर्मधारय (करनिधारेइ एकुन)
- (घ) अव्ययीभाव
उत्तर देखें
(ग) विशेषण-विशेष्य संबंध।
"राजाघार, जनमभूंइ, बनदेवी" किस तत्पुरुष के उदाहरण हैं?
- (क) कर्म
- (ख) संबंध (नाता दासा एकुन)
- (ग) अपादान
- (घ) करण
उत्तर देखें
(ख) राजा का घर, जन्म की भूमि।
"गांवछाड़ा, घारछाड़ा" किस तत्पुरुष के उदाहरण हैं?
- (क) अपादान (बेलग दासा)
- (ख) सम्प्रदान
- (ग) संबंध
- (घ) अधिकरण
उत्तर देखें
(क) गाँव से अलग।
"निठुर, अभागा, अबुझ" किस समास के उदाहरण हैं?
- (क) द्विगु
- (ख) द्वंद्व
- (ग) कर्मधारय
- (घ) नञ् तत्पुरुष
उत्तर देखें
(घ) अ/नि/अन से निषेध।
मध्यपदलोपी समास का कुरमाली नाम है —
- (क) अलुक् दासा एकुन
- (ख) पेंउदा एकुन
- (ग) लुकानिपद एकुन
- (घ) लेखा एकुन
उत्तर देखें
(ग) बीच के पद लुप्त।
संदर्भ
ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:
- डॉ. हरदेव नारायण सिंह, "कुरमाली व्याकरण", झारखण्ड झरोखा, राँची, 2017 (ISBN 978-93-85595-21-9), पृ. 30–37, 51–54