झारज्ञान

पत्र 2 · जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (कुरमाली) · अध्याय 5

कुरमाली कारक, वचन और लिंग (परिक, लेखा)

कुरमाली · कुड़माली · Kurmali · Kudmali

कुरमाली में बहुवचन के लिए अलग शब्द नहीं होते, प्रत्यय जुड़ते हैं; चाँद-सूरज स्त्रीलिंग हैं; और कारक के चिह्न हिंदी से अलग हैं — ये तीनों बातें परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं।

अंतिम अपडेट: 2026-10-14

इस अध्याय में
  1. कारक (परिक) और उसके चिह्न
  2. हर कारक के उदाहरण
  3. वचन (लेखा)
  4. सांगी लेखा बनाने के 7 नियम
  5. लिंग के 4 भेद
  6. नर से मादा लिंग बनाने के नियम
  7. नर-मादा जोड़े
  8. रूप की खास बातें (रूपात्मक विशेषताएँ)
  9. पारिभाषिक शब्दावली
  10. अभ्यास प्रश्न

कारक (परिक) और उसके चिह्न

वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे कारक (परिक) कहते हैं। कारक का अर्थ है — करेइया (करने वाला)। हिंदी की तरह कुरमाली में भी 8 परिक हैं। कारक-चिह्न (विभक्ति) को चिनहा कहते हैं।

कारककुरमाली नामचिह्न (चिनहा)
कर्ताकरमि परिकए, इं, एँ, 0 (चिह्न-रहित)
कर्मकरनि परिकके, 0
करणदाराइज परिकले, दारा (ए, इं भी)
सम्प्रदानदानिन परिकलाइ, लागिन, हाँतिर, खातिर, तेहें, लेल
अपादानबेलग परिकले
संबंधनाता परिकक, कर, एक
अधिकरणठेधान परिकए, उपर, माहान
संबोधनबधान परिकएगो, एलो, रे, एहो, हें, एरे, अरे
दो कारक, एक चिह्नले करण (साधन — "से") और अपादान (अलग होना — "से") दोनों का चिह्न है। अर्थ से पहचानें: साइकिले (साइकिल से = साधन) बनाम गाछ ले (पेड़ से = अलग होना)।
कर्ता के चिह्न पर मतभेदग्रंथ बताता है कि कुछ व्याकरण-लेखक कुरमाली के कर्ता कारक को चिह्न-रहित मानते हैं, कुछ चिह्न-सहित। अकारांत, आकारांत, इकारांत, उकारांत शब्दों में जो प्रत्यय (ए, इं) जुड़ता है (रामे, सीताइं), उसे कर्ता का चिह्न माना जा सकता है। ग्रंथ पं. किशोरीदास वाजपेयी की विभक्ति-व्यवस्था (संबंध विभक्ति और संश्लिष्ट विभक्ति) का आधार लेता है।

हर कारक के उदाहरण

कारकउदाहरण (ग्रंथ से)हिंदी
कर्तारामे खाइस। सीताइं खाइस आही।राम खाता है। सीता खाती है।
कर्मराम के डाकाहाक।राम को बुलाओ।
करणतर दारा कनऽ काम नि हेकत। साइकिले घार गेल।तुम्हारे द्वारा कोई काम नहीं होगा। साइकिल से घर गया।
सम्प्रदानछवाटा मिठाइ लाइ कांदेइस। मोंय तर खातिर आवलों।लड़का मिठाई के लिए रोता है। मैं तुम्हारे लिए आया।
अपादानगाछ ले पालहा गिरलेइक। छवा स्कूल ले घार गेला।पेड़ से पत्ता गिरा। बच्चे स्कूल से घर गए।
संबंधजेठुक घार। दीदीक टेंठी। पुसुकर चाइरटा बेटा।जेठु का घर। दीदी की … । पुसु के चार बेटे।
अधिकरणगाछ उपरे कने आहे? उँडु माहान सांप आहात। राम घारे आहे।पेड़ के ऊपर कौन है? बिल में साँप हैं। राम घर में है।
संबोधनएरे, घार जाबे न? एगो तरा काहाँ जाहिया?अरे, घर जाओगे न? अजी, आप कहाँ जा रहे हैं?

वचन (लेखा)

जिस शब्द से संख्या का बोध हो, उसे वचन (लेखा) कहते हैं। दो भेद:

वचनकुरमाली नामउदाहरण
एकवचनएक लेखाछवा, पथि, छागेइर, मोंय, तोंय, गरखिया
बहुवचनसांगी लेखा / ढेइर लेखाछवागिला, गरूगिला, बेटारा, गरखियागिला
मूल नियम: कुरमाली में बहुवचन के लिए अलग शब्द नहीं होते। एकवचन में रा, गिला, गिली, गिलिन, गुली, गुला, सभ प्रत्यय जोड़कर बहुवचन बनता है।

सांगी लेखा बनाने के 7 नियम

#नियमउदाहरण
1सर्वनाम के बहुवचन रूपमोंय, हामें → हामरा, हामरे; तोंय → तहरा, तहरे; ओंय, उ, एइं → अखरा, एखरा, अरा
2'रा' जोड़करबेटारा, भाइरा, बहिनरा
3'गिला' (पुल्लिंग/सामान्य) और 'गिली, गुली' (स्त्रीलिंग) जोड़करगरूगिला, मानुसगिला, बाछुरगिला, दामड़ागिला; गायगिली, बेटीछवागिली
4संज्ञा से पहले बहुतायत वाला विशेषण लगाकरआनखाइ माछी, ससतागेड़े, बेदार टेमरस, ढेइर आम, दमतक डिंगला
5समूह-सूचक शब्द संज्ञा से पहले: हाला, नुड़ा, कुधा, डिंग, पाल, खाता, गठ, झंपेइरएक हालामाछ, एक नुड़ापात, एक कुधा गोबर, एक पाल बांदर, एक गठ छागेइर, एक डिंग पंवार
6गंछा, थंप, धउद, झंप एकवचन से पहलेएक थंप फूल, एक धउद कुसुम, एक गंछा पइना
7'सभ' जोड़करछवा सभ
शब्दों के अर्थछवा = बच्चा/लड़का, छागेइर = बकरी, गरू = मवेशी, बाछुर = बछड़ा, बांदर = बंदर, पथि = किताब।

लिंग के 4 भेद

जिस शब्द से नर या मादा का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं। कुरमाली में 4 लिंग हैं।

लिंगकुरमाली नामउदाहरण
पुल्लिंगनर लिंगमरद, बरद, काड़ा, सांड़हा, बाघ, दामड़ा
स्त्रीलिंगमादा लिंगगाय, ढाइड़, फेटाइन, संड़हूर, बाघिन
उभयलिंगदुजिलिंगछवा, गरू, बाछुर, फिकड़ो, पेरूवा
नपुंसकलिंगलेहरा लिंगगाछ, भूइं, पाहाड़
हिंदी से अंतरहिंदी में केवल 2 लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग) हैं, कुरमाली में 4 — नर, मादा, दुजि, लेहरा।

कुरमाली में लिंग से क्रिया बदलती है: जेठु आवताक (पुल्लिंग), बुधनी आवती (स्त्रीलिंग)। सकर्मक और अकर्मक दोनों क्रियाओं में लिंग कर्ता के अनुसार होता है। कभी-कभी सर्वनाम का लिंग केवल क्रिया से पता चलता है: उ गेलाक (वह गया), उ गेली (वह गई)।

नर से मादा लिंग बनाने के नियम

#नियमउदाहरण
1पुल्लिंग में आ, एक, इ, ई आदि प्रत्ययचाड़का–चेड़की, थुभड़ा–थुभड़ी, लेका–लेकी, लेलहा–लेलही, चेंदरा–चेंदरी, कुइला–कुइली, चेपा–चेपी, बड़का–बड़की, छटका–छटकी
2संज्ञा के बाद 'टी' (टा की जगह)कुकुरटा–कुकुरटी, छवाटा–छवाटी, गाछटा–गाछटी
3अन्य पुरुष बहुवचन में 'गिली, गिलिन'बांदरगिला–बांदरगिली, बांदरगिलिन; पेरूवागिला–पेरूवागिली
4छोटे जीव-जंतु सामान्यतः स्त्रीलिंगटिकटिकी गिरली। खांखड़ा बिछाइं बिंधली। चिमटीइं चाबली।
5कुछ जोड़ों का कोई नियम नहीं — अलग शब्दबाप–मायं, बरद–गाय, मरद–जेनी, काड़ा–भंइसा, भेंसुर–जेठानी, दादा–भउजि, बर–केनियाइ, दामड़ा–फेटाइन
6चाँद, सूरज स्त्रीलिंग; तारा पुल्लिंग; हाथी स्त्रीलिंगसुरूज उठली। चांद उठली। तारिया उठला। एकटी हाथी आवेइस आही।
7कुछ विशेषणों से लिंग बदलता हैसुंदर–सुंदरी
सबसे अधिक पूछा जाने वाला नियमकुरमाली में चाँद, सुरूज (सूरज) और हाथी स्त्रीलिंग माने जाते हैं: चाँद उगली, सुरूज डुबली, हाथीटी आवेइ आही। तारिया एकवचन में स्त्रीलिंग (एकटी तारिया उगली) और बहुवचन में पुल्लिंग (तारियागिला डुबला) — ग्रंथ में पृ. 43 पर तारिया को नरलिंग कहा गया है, पृ. 44–45 पर यह विस्तार दिया गया है।

नर-मादा जोड़े (पुलिंग से स्त्रीलिंग)

रूप की खास बातें (रूपात्मक विशेषताएँ)

  1. नर और मादा संज्ञा के रूप में अंतर नहीं होता; संज्ञा में टा, टी प्रत्यय लगते हैं।
  2. नर और मादा के लिए क्रिया के एकवचन-बहुवचन रूप अलग होते हैं (जाइस आहे / जाइस आही / जाहात)।
  3. काल, वचन और पुरुष के अनुसार क्रिया बदलती है — क्रिया का चार्ट देखें।
  4. आदरसूचक शब्द नहीं; आदर के लिए क्रिया का बहुवचन: मर सास आवता।
  5. उभयलिंग (दुजिलिंग) शब्दों में टा / टी से लिंग बताते हैं: कुकुरटा–कुकुरटी, खुखड़ीटा–खुखड़ीटी, गरूटा–गरूटी।
  6. सर्वनाम का लिंग क्रिया से पता चलता है: उ गेलाक / उ गेली।
  7. चाँद, सूरज, हाथी स्त्रीलिंग।
  8. बहुवचन प्रत्यय: रा, सभ, गिला, गिली, गिलिन, गुला।
  9. निश्चयवाचक सर्वनाम तीन: इ, उ, हाऊ।
  10. 'होना' के लिए आहे, आहों, आहेइक, हेके, आहिस।
  11. निषेध के लिए ना, नि, नेही, निहिं।

पारिभाषिक शब्दावली

हिंदीकुरमालीEnglish
कारकपरिकCase
विभक्ति / चिह्नचिनहाCase marker
कर्ताकरमिSubject / Nominative
कर्मकरनिObject / Accusative
वचनलेखाNumber
एकवचनएक लेखाSingular
बहुवचनसांगी लेखा / ढेइर लेखाPlural
पुल्लिंगनर लिंगMasculine
स्त्रीलिंगमादा लिंगFeminine
उभयलिंगदुजिलिंगCommon gender
नपुंसकलिंगलेहरा लिंगNeuter

अभ्यास प्रश्न

  1. कुरमाली में कारक को क्या कहते हैं?

    1. (क) लेखा
    2. (ख) परिक
    3. (ग) चिनहा
    4. (घ) झन
    उत्तर देखें

    (ख) परिक = कारक।

  2. कुरमाली में कितने कारक (परिक) हैं?

    1. (क) 8
    2. (ख) 6
    3. (ग) 7
    4. (घ) 4
    उत्तर देखें

    (क) हिंदी की तरह 8।

  3. संबंध कारक (नाता परिक) के चिह्न हैं —

    1. (क) के, 0
    2. (ख) ए, उपर, माहान
    3. (ग) ले, दारा
    4. (घ) क, कर, एक
    उत्तर देखें

    (घ) जेठुक घार, पुसुकर बेटा।

  4. "अपादान कारक" का कुरमाली नाम है —

    1. (क) ठेधान परिक
    2. (ख) दानिन परिक
    3. (ग) बेलग परिक
    4. (घ) बधान परिक
    उत्तर देखें

    (ग) बेलग = अलग।

  5. "गाछ ले पालहा गिरलेइक" में "ले" किस कारक का चिह्न है?

    1. (क) करण
    2. (ख) अपादान
    3. (ग) संबंध
    4. (घ) कर्म
    उत्तर देखें

    (ख) पेड़ से अलग होना।

  6. सम्प्रदान कारक (दानिन परिक) का चिह्न कौन-सा है?

    1. (क) खातिर
    2. (ख) माहान
    3. (ग) कर
    4. (घ) एगो
    उत्तर देखें

    (क) लाइ, लागिन, हाँतिर, खातिर, तेहें, लेल।

  7. "उँडु माहान सांप आहात" में "माहान" किस कारक का चिह्न है?

    1. (क) संबंध
    2. (ख) करण
    3. (ग) सम्प्रदान
    4. (घ) अधिकरण (ठेधान परिक)
    उत्तर देखें

    (घ) में — अधिकरण।

  8. कर्म कारक (करनि परिक) का चिह्न है —

    1. (क) क
    2. (ख) ले
    3. (ग) के
    4. (घ) ए
    उत्तर देखें

    (ग) राम के डाकाहाक।

  9. कुरमाली में बहुवचन को क्या कहते हैं?

    1. (क) एक लेखा
    2. (ख) सांगी लेखा
    3. (ग) दुजि लेखा
    4. (घ) लेहरा लेखा
    उत्तर देखें

    (ख) सांगी/ढेइर लेखा।

  10. "बेटा" का बहुवचन ग्रंथ के अनुसार है —

    1. (क) बेटारा
    2. (ख) बेटे
    3. (ग) बेटागिली
    4. (घ) बेटासभा
    उत्तर देखें

    (क) "रा" जोड़कर।

  11. स्त्रीलिंग बहुवचन के लिए कौन-सा प्रत्यय लगता है?

    1. (क) गिला
    2. (ख) टा
    3. (ग) रा
    4. (घ) गिली
    उत्तर देखें

    (घ) गायगिली, बेटीछवागिली।

  12. "तोंय" का बहुवचन है —

    1. (क) हामरा
    2. (ख) अखरा
    3. (ग) तहरा
    4. (घ) एखरा
    उत्तर देखें

    (ग) मध्यम पुरुष।

  13. कुरमाली में कितने लिंग माने गए हैं?

    1. (क) 2
    2. (ख) 4
    3. (ग) 3
    4. (घ) 5
    उत्तर देखें

    (ख) नर, मादा, दुजि, लेहरा।

  14. "उभयलिंग" को कुरमाली में क्या कहते हैं?

    1. (क) दुजिलिंग
    2. (ख) लेहरा लिंग
    3. (ग) मादा लिंग
    4. (घ) नर लिंग
    उत्तर देखें

    (क) दोनों का बोध।

  15. "गाछ, भूइं, पाहाड़" किस लिंग के उदाहरण हैं?

    1. (क) नर लिंग
    2. (ख) मादा लिंग
    3. (ग) दुजिलिंग
    4. (घ) लेहरा लिंग (नपुंसक)
    उत्तर देखें

    (घ) न नर, न मादा।

  16. कुरमाली में "सुरूज" (सूरज) किस लिंग में प्रयुक्त होता है?

    1. (क) पुल्लिंग
    2. (ख) नपुंसकलिंग
    3. (ग) स्त्रीलिंग
    4. (घ) उभयलिंग
    उत्तर देखें

    (ग) सुरूज उठली / डुबली।

  17. "कुकुरटा" का स्त्रीलिंग है —

    1. (क) कुकुरी
    2. (ख) कुकुरटी
    3. (ग) कुकुरिन
    4. (घ) कुकुरगिली
    उत्तर देखें

    (ख) टा → टी।

  18. "बर" (दूल्हा) का स्त्रीलिंग है —

    1. (क) केनियाइ
    2. (ख) बहुरिया
    3. (ग) बरी
    4. (घ) बरिन
    उत्तर देखें

    (क) बिना नियम का जोड़ा।

  19. "मरद" का स्त्रीलिंग है —

    1. (क) मरदी
    2. (ख) तिरिया
    3. (ग) मायं
    4. (घ) जेनी
    उत्तर देखें

    (घ) मरद–जेनी।

  20. "उ गेली" से सर्वनाम "उ" का लिंग कैसे पता चलता है?

    1. (क) सर्वनाम के रूप से
    2. (ख) कारक से
    3. (ग) क्रिया के रूप से
    4. (घ) वचन से
    उत्तर देखें

    (ग) गेली — स्त्रीलिंग क्रिया।

संदर्भ

ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:

  • डॉ. हरदेव नारायण सिंह, "कुरमाली व्याकरण", झारखण्ड झरोखा, राँची, 2017 (ISBN 978-93-85595-21-9), पृ. 37–45, 67–68