पत्र 2 · जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (कुरमाली) · अध्याय 9
कुरमाली विपरीतार्थक, श्रुतिसम, ऊनार्थक और एक शब्द
कुरमाली · कुड़माली · Kurmali · Kudmali
शब्द-ज्ञान के चार हिस्से: उलटे अर्थ वाले जोड़े (उलट बग्गा), एक जैसे सुनाई देने वाले पर अलग अर्थ वाले शब्द, छोटेपन का बोध कराने वाले शब्द, और लंबे वाक्यांश के लिए एक कुरमाली शब्द।
अंतिम अपडेट: 2026-10-14
इस अध्याय में
विपरीतार्थक शब्द (उलट बग्गा)
उलटे अर्थ वाले शब्दों को कुरमाली में उलट बग्गा या उलथा कहते हैं।
हिंदी अर्थ सहित प्रमुख जोड़े
| शब्द | विलोम | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|
| आगु | पेछु | आगे – पीछे |
| आवल | गेल | आया – गया |
| उपर | हेंठ | ऊपर – नीचे |
| उगल | डुबल | उगा – डूबा |
| बाहेइर | भीतर | बाहर – भीतर |
| बेचा | किना | बेचना – खरीदना |
| आइज | काइल | आज – कल |
| सांइझ | बिहान | साँझ – सुबह |
| आसते | रागे | धीरे – तेज़ |
| चेत | अचेत | होश – बेहोश |
| सरम | बेसरम | लाज – बेशर्म |
| भरम | बेभरम | — |
| मिछ | सांचा | झूठ – सच |
| मुलुक | परदेस | अपना देश – परदेस |
| पाकल | कांचा | पका – कच्चा |
| ढांपल | उघरल | ढका – खुला |
| तातल | जुड़ाल | गर्म – ठंडा |
| हेंठ | ऊँचऽ | नीचा – ऊँचा |
| अगली | पेछली | अगली – पिछली |
| नेकी | बदी | भलाई – बुराई |
| चिनहाप | अनचिनहाप | पहचाना – अनजाना |
| चेठा | अचेठा | — |
| ढांगा | नाटा | लंबा – नाटा |
| रउद | छांहेइर | धूप – छाँव |
| ताक | बेताक | — |
| हेला | अहेला | — |
| लस | बेलस | — |
| जड़ | बिजड़ | — |
| आलऽ | आंधार | उजाला – अँधेरा |
| आपुस | पर | अपना – पराया |
ग्रंथ की सूची के अन्य जोड़े
- अदा–सूखल
- अटक–छाइड़
- आँट–आवसान / उसास
- गला–ढांगर
- गाड़हा–टिकरा
- गुड़िया–तीता
- घाइत–बेघाइत
- आलना–जानाल
- आवगार–सेव / सेउ
- आनसा–साइंसुइं
- आघाल–अझड़ल
- उसट–चँहट
- उबडू–उतना
- उधना–गुड़िया
- उसना–आरवा
- कचकच–सुरूखुरू
- कसनी–आबगास
- कालहा–उरगुम
- खरऽ–मालऽ / मालह
- खाँड़ा–गटा
- खाता–एकइड़ा
- निड़ा–फरा, फंफरा
- चज–हेला
- चखऽ–भथड़ऽ / भटकऽ
- गित–पट
- चुहुल–निचाल
- चारका–केरिया
- चिपास–दानी
- जूंठा–मुनू
- झाइल–खाटऽ
- ठाउँ–धूर / फाराक
- डाँटऽ–लुरूपुरू
- ठसा–चिमड़ऽ
- डागर–लालहर
- तागड़ा–लड़ीपिड़ी
- दमें–रिचिक / थड़ेक
- धरन–झेइड़
- धीरे–रागे
- नाभान–उठान
- सरबर–कटकिना
- पाकठऽ–कंचड़ा, लिड़ी पिड़ी
- पाहुड़–जीतकार
- पुरऽ–पातला
- फइल–सांकट
- फझर–सांइझ
- बांड़चू–झंपर
- बासी–रका, टाटका
- बेसियाम–आड़बेरा
- बेदार–टुकुन
- भालऽ–मन्दऽ
- मटा–सरू
- मीर–ढड़ही
- मेही–झिंझरा
- मुखड़–मुचर
- रिचिक–सांगी
- लालहर–झंपर
- सझऽ–बांकऽ
- सामा–बाहरा
- सामलात–भिनु
- सेमगाल–ठनकऽ
- सुसती–चाँड़
- हेमाल–ठनकल
- एसवाड़ी–असवाड़ी
- गंऽ–बेगंऽ
- गड़–मुड़
- अर (अड़)–मुड़ा
- सरफा–माहगा
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (101)
जो शब्द सुनने में लगभग एक जैसे हों पर अर्थ अलग हों (सुनेइत के समान माने भिनु-भिनु)। अर्थ ग्रंथ से लिए गए हैं।
| शब्द | अर्थ | शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| आंट | कठिन | आंटा (क्रि.) | कसना |
| आंवा | घड़े पकाने का स्थान | आवा | आइये |
| अदा | ठीक से न सूखा | आदा | अदरख |
| कांड़ | बल्ली | कांड | तीर |
| कुंड़ी | पानी उठाने का बर्तन | कुड़ी | बीस |
| कुहरा | कुहासा | कुंहरा | कष्ट में मनुष्य की आवाज़ |
| काँचा | धपका, कमज़ोर | काचा | पहनने का वस्त्र / कपड़ा साफ़ करना |
| कुधा | समूह, ढेर | कूदा | दौड़ना |
| करा | गोद | करा (क्रि.) | कीजिए |
| काठ | लकड़ी | काठ़ | चालीस पइला (माप) |
| खँच | प्रश्न; महुआ का फूल | खांटी | शुद्ध |
| खाटी | खाट | खेरेइ | खलिहान |
| खाराइ | जलकर काला होना | गाभा | गहरा; चौड़ा |
| गारा (क्रि.) | निचोड़ना | गारा (सं.) | मिश्रित पदार्थ (मिट्टी का गारा) |
| गाइर | गाली | गतर | गात (शरीर) |
| गतरऽ | कुल, वंश | जाम | जाऊँगा |
| जाग | जागुन | जारा | जो; पतला जंगल |
| टान | अकाल, अभाव; खिंचाव | टांगा (क्रि.) | टांगना |
| टांगा (सं.) | कुल्हाड़ी | टकरा | छोटा खेत |
| टिकरा | ऊँचा स्थान | ठाइं | जगह; थाली |
| डउल | बाल्टी; ख़त्म होना | डहर | रास्ता |
| तांत | कपड़ा बुनने का यंत्र | ताव | आग की लपट |
| तावा | एक बर्तन | दामड़ा | छोटा बैल |
| थरन | वृष्टि का अभाव, सूखा | धरन | स्वभाव, प्रकृति |
| दाढ़ी | जला हुआ दूध; मूँछ-दाढ़ी | नाभान | उतार, ढाल; लंबाई |
| पांचन | एक प्रकार की साड़ी | पाचन | पचाने की बड़ी |
| पांका | कीचड़ की मिट्टी | फांका | व्यर्थ, बेकार |
| पांठी | छोटी बकरी | पाठा | छोटा बकरा; भेजना |
| पारा (क्रि.) | सकना | पारेइ | अंडा देना |
| पन | प्रतिज्ञा | पन (पण) | कन्या को दी जाने वाली राशि |
| बान | बाढ़; धान के पौधे | बाझी | व्यस्त होना |
| बांझी | निःसंतान स्त्री | बेरा | हाथ का कंगन; सूर्य, काल, समय |
| बर | दूल्हा | बड़ | एक पेड़ (बरगद) |
| बड़ऽ | बड़ा | बाढ़ा | बढ़ना; साफ़ करना, झाड़ू देना |
| बांट | गाय का थन | बांटा | हिस्सा |
| संग | साथ | संगऽ | समाप्त |
| भार | ज़िम्मेदारी; वज़न, बंहगी | भकुवा | बेवकूफ़ |
| भरसा | शक्ति, ताक़त | भरसी | अंगीठी |
| मने | याद, स्मरण | मन | एक पौधा; चालीस सेर |
| मुंदना | बंद करना | मुंधना | घर का ऊपरी हिस्सा |
| राग | क्रोध | रागे | तेज़ गति |
| लर | आँसू | लार | लार |
| सलुक | श्लोक, लोकोक्ति | सालुक | कमल फूल |
| लाठा | गोंद | लेठा | झंझट |
| लड़हा | फूल चुनना | लड़ही | मसाला पीसने का सिलौटा |
| सिका | गोदना | सुधिया | पूछना |
| धाइर | किनारा | झाइर | बार-बार |
| हाल | नमी | हिसका | ईर्ष्या |
| हिसकऽ | आदत | फर | फल |
| फार | फाल | गादा | भीड़; मज़बूत बनाने के लिए पीटना |
| ढनगल | लेटा हुआ |
ऊनार्थक शब्द (24)
जो शब्द किसी वस्तु के छोटे रूप का बोध कराएँ (बड़क छटऽ साड़ा)।
| शब्द | ऊनार्थक | शब्द | ऊनार्थक |
|---|---|---|---|
| घार | कुड़िया | जाँता | जाँती |
| खाँचा | खाँची | टंकी | टुपा |
| नेदी | सेतिया, जुड़िया | डाबेइर | टकरा |
| डुभा | डुभी | पाहाड़ | टुंगरी |
| बांध | गेड़िया | सूप | सुपली |
| हाँड़ा | हाँड़ी | लुआठी | तितकी |
| टांगा | टेंइगला | धासना | आड़ड़ |
| डांग | ठेंगा | खाटी | खेइटला |
| ढकना | ढकनी | मूसा | चुटिया |
| आंगरा | फुरूंग | थारी | छिपा |
| ढल | ढलकी | टीका | टिकली |
| पाखन | रूगड़ी | लड़हा | लड़ही |
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (ढेइर साड़ाक एक साड़ा)
ग्रंथ में वाक्यांश कुरमाली में दिए गए हैं; यहाँ उनका हिंदी भाव और कुरमाली एक-शब्द दिया गया है।
| वाक्यांश (हिंदी भाव) | एक शब्द (कुरमाली) |
|---|---|
| जिस स्त्री के दाँत कंघी जैसे हों | चिरूनदांती |
| जो व्यक्ति विवाह के बाद ससुराल में रहे | घारजावाइं |
| जिसका पेट तेलाई (बर्तन) जैसा हो | तेलाइपेटा |
| जिसका पेट बेडौल हो | ढिड़रापेटा |
| जिसे ज़रा भी लाज न हो | लिलज |
| जिसकी पत्नी मर गई हो | रांड़ा |
| जिस स्त्री का पति मर गया हो | रांड़ी |
| जो कम बोले | मुंहचर |
| जो ज़्यादा बोले | मुखड़ |
| जब तक जीवन रहे | जाबत जीवन |
| खलिहान में सोने के लिए पुआल का बना घर | कुंबा |
| जो खेती-बाड़ी का काम करे | चासा |
| जिसने सिर मुँड़वाया हो | मुंड़रा |
| जिसके सिर पर बाल न हों | चांदला |
| जिस लड़की की उम्र होने पर भी विवाह न हुआ हो | थुभड़ी |
| जो बहुत लोभ करे | लउठाहा |
| जो भविष्य की बात जान सके | अगमजानी |
| जिस स्त्री की संतान न हो | बांझी |
| रात में पशु चराने जाना | पसरचरा |
| दोपहर और साँझ के बीच का समय | आड़बेरा |
| सुबह और दोपहर के बीच का समय | बेसियाम |
| पशुओं के चरने की जगह | चाराट |
| जिसे किसी काम का ढंग न हो | बेलुरिया |
| जिसके हाथ में छह उँगलियाँ हों | जेरका |
| जिसने कभी कुछ देखा न हो | आदिखलाहा |
| जिस स्त्री को थोड़ी भी लाज न हो | बेहया |
| जो हर जगह खाता फिरे | पातेइर चाटाहा |
| जिस स्त्री का कपाल ऊँचा हो | ऊंचकापाड़ी |
अभ्यास प्रश्न
विपरीतार्थक शब्द को कुरमाली में क्या कहते हैं?
- (क) एकुन
- (ख) उलट बग्गा
- (ग) पाइन
- (घ) बड़क छटऽ साड़ा
उत्तर देखें
(ख) उलट बग्गा / उलथा।
"आगु" का विपरीतार्थक शब्द है —
- (क) पेछु
- (ख) उपर
- (ग) हेंठ
- (घ) भीतर
उत्तर देखें
(क) आगे – पीछे।
"सांइझ" का विपरीतार्थक है —
- (क) राइत
- (ख) आइज
- (ग) दुपहर
- (घ) बिहान
उत्तर देखें
(घ) साँझ – सुबह।
"बाहेइर" का विपरीतार्थक है —
- (क) धूर
- (ख) उपर
- (ग) भीतर
- (घ) पासे
उत्तर देखें
(ग) बाहर – भीतर।
"बेचा" का विपरीतार्थक है —
- (क) देवा
- (ख) किना
- (ग) लेगा
- (घ) पावा
उत्तर देखें
(ख) बेचना – खरीदना।
"मिछ" का विपरीतार्थक है —
- (क) सांचा
- (ख) बेस
- (ग) बदी
- (घ) सरम
उत्तर देखें
(क) झूठ – सच।
"पाकल" का विपरीतार्थक है —
- (क) सूखल
- (ख) बासी
- (ग) तातल
- (घ) कांचा
उत्तर देखें
(घ) पका – कच्चा।
"कुड़ी" का अर्थ है —
- (क) पानी उठाने का बर्तन
- (ख) झोपड़ी
- (ग) बीस
- (घ) कुहासा
उत्तर देखें
(ग) कुंड़ी = बर्तन; कुड़ी = बीस।
"खेरेइ" का अर्थ है —
- (क) खाट
- (ख) खलिहान
- (ग) शुद्ध
- (घ) गाली
उत्तर देखें
(ख) श्रुतिसम सूची।
"सालुक" का अर्थ है —
- (क) कमल फूल
- (ख) श्लोक
- (ग) गोंद
- (घ) आँसू
उत्तर देखें
(क) सलुक = श्लोक; सालुक = कमल।
"भरसी" का अर्थ है —
- (क) शक्ति
- (ख) ज़िम्मेदारी
- (ग) बेवकूफ़
- (घ) अंगीठी
उत्तर देखें
(घ) भरसा = शक्ति; भरसी = अंगीठी।
"टांगा" (संज्ञा) का अर्थ है —
- (क) छोटा खेत
- (ख) टांगना
- (ग) कुल्हाड़ी
- (घ) रास्ता
उत्तर देखें
(ग) क्रिया = टांगना।
"पाहाड़" का ऊनार्थक शब्द है —
- (क) टकरा
- (ख) टुंगरी
- (ग) टिकरा
- (घ) डांग
उत्तर देखें
(ख) पहाड़ → पहाड़ी।
"घार" का ऊनार्थक शब्द है —
- (क) कुड़िया
- (ख) घारटा
- (ग) कुंबा
- (घ) खेरेइ
उत्तर देखें
(क) घर → कुटिया।
"सूप" का ऊनार्थक है —
- (क) सुपटा
- (ख) सुपा
- (ग) सूपी
- (घ) सुपली
उत्तर देखें
(घ) ग्रंथ की सूची।
जिसके हाथ में छह उँगलियाँ हों, उसे कुरमाली में क्या कहते हैं?
- (क) लिलज
- (ख) चांदला
- (ग) जेरका
- (घ) मुंहचर
उत्तर देखें
(ग) ढेइर साड़ाक एक साड़ा।
जो व्यक्ति विवाह के बाद ससुराल में रहे —
- (क) चासा
- (ख) घारजावाइं
- (ग) रांड़ा
- (घ) मुंड़रा
उत्तर देखें
(ख) घर-जमाई।
जो कम बोले, उसे कहते हैं —
- (क) मुंहचर
- (ख) मुखड़
- (ग) बेहया
- (घ) अगमजानी
उत्तर देखें
(क) मुखड़ = ज़्यादा बोलने वाला।
सुबह और दोपहर के बीच का समय —
- (क) आड़बेरा
- (ख) सांइझ
- (ग) बिहान
- (घ) बेसियाम
उत्तर देखें
(घ) आड़बेरा = दोपहर और साँझ के बीच।
जो भविष्य की बात जान सके —
- (क) आदिखलाहा
- (ख) बेलुरिया
- (ग) अगमजानी
- (घ) लउठाहा
उत्तर देखें
(ग) अगम = आगे की।
संदर्भ
ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:
- डॉ. हरदेव नारायण सिंह, "कुरमाली व्याकरण", झारखण्ड झरोखा, राँची, 2017 (ISBN 978-93-85595-21-9), पृ. 68–79