झारज्ञान

पत्र 2 · जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (कुरमाली) · अध्याय 8

कुरमाली वाक्य, वाच्य और विराम चिह्न (टुम, काथा)

कुरमाली · कुड़माली · Kurmali · Kudmali

कुरमाली में वाक्य के भेद हिंदी जैसे ही हैं, पर नाम अलग हैं। वाच्य केवल दो माने गए हैं (हिंदी में तीन), और विराम चिह्नों के कुरमाली नाम परीक्षा में पूछे जाते हैं।

अंतिम अपडेट: 2026-10-14

इस अध्याय में
  1. वाक्य (टुम) और उसके अंग
  2. रचना के आधार पर 3 भेद
  3. अर्थ के आधार पर 8 भेद
  4. वाच्य (काथा)
  5. विराम चिह्न (थाँभान चिनहा)
  6. पारिभाषिक शब्दावली
  7. अभ्यास प्रश्न

वाक्य (टुम) और उसके अंग

शब्दों का ऐसा जुड़ाव जिससे निश्चित (धारिज) अर्थ प्रकट हो, वाक्य (टुम) कहलाता है — रघुइं आम खाइस। रामे भात खाइस आहे।

अंगकुरमाली नामपहचानउदाहरण: रघुइं आम खाइस
उद्देश्य (Subject)धेइजिसके बारे में कहा जाए; संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि हो सकता हैरघु (कर्ता — करमि)
विधेय (Predicate)खेइउद्देश्य के बारे में जो कहा जाएखाइस

वाक्य के भेद तीन दृष्टियों से होते हैं: रचना (गड़हनेक दांइजे), अर्थ (भाभेक अनुजाइं) और क्रिया (सरानेक दांइजे) — क्रिया की दृष्टि से भेद ही वाच्य हैं।

रचना के आधार पर 3 भेद

भेदकुरमाली नामपहचानउदाहरण (ग्रंथ से)
सरल / साधारण वाक्यमटामटि टुमएक उद्देश्य, एक विधेय, एक क्रियाफागु जाइस आहे। पानी बरसे हेइक।
मिश्र वाक्यजड़न / मेसानु टुमएक प्रधान वाक्य + उस पर आश्रित दूसरा उपवाक्यइटा एहे घारटा हेकेइक जाहाँ मोंय रहे हेलों। — यह वही घर है जहाँ मैं रहता था।
संयुक्त वाक्यभजानु टुमदो या अधिक स्वतंत्र वाक्य, अव्यय से जुड़े; सबका अपना अर्थओंय आवल आर मोंय गेलों। — वह आया और मैं गया।
भ्रम से बचेंस्वर के प्रसंग में भजानु = व्यंजन, पर वाक्य के प्रसंग में भजानु टुम = संयुक्त वाक्य। और जड़न टुम = मिश्र वाक्य (संयुक्त नहीं)।

अर्थ के आधार पर 8 भेद

भेदकुरमाली नामउदाहरण (ग्रंथ से)हिंदी
विधिवाचकमटामटि / साधारण टुममोंय पथि पढ़ल आहों।मैंने किताब पढ़ी है।
निषेधवाचकबारन टुममोंय नि खाल आहों। न ससुर आवल न सास।मैंने नहीं खाया है। न ससुर आए न सास।
आज्ञावाचकआड़हान टुमसाँचा कहें। घार जाइं। बड़ऽ लगेक काथा सुनें।सच कहो। घर जाओ। बड़ों की बात सुनो।
प्रश्नवाचकखँच टुमतोंय काहाँ जाइस? तोंय मेला देखे नि जाबे?तुम कहाँ जाते हो? तुम मेला देखने नहीं जाओगे?
विस्मयादिबोधकबधान टुमबाह! एतेक चाड़े आवले। आह! दरदे मोंय मरी जाहों।वाह! इतनी जल्दी आ गए। आह! दर्द से मैं मरा जा रहा हूँ।
इच्छावाचकबांछा टुमतर मनेक साध पूरन हेउक।तुम्हारे मन की इच्छा पूरी हो।
संदेहवाचकदगधा टुमओंय आपन काम पाइट करल हेताक।उसने अपना काम-काज कर लिया होगा।
संकेतवाचक—जदि पढ़ेतेलिस तऽ इ दासा नि हेइतेलोऊ।यदि पढ़ते तो यह दशा न होती।
पहचान के संकेतनि / ना / न…न → निषेध; काहाँ, कन, किना और ? → प्रश्न; बाह, आह और ! → विस्मय; हेउक (हो) → इच्छा; हेताक / हेत (होगा) → संदेह; जदि … तऽ → संकेत।

वाच्य (काथा)

क्रिया का वह रूप जिससे पता चले कि वाक्य में कर्ता (करमि) और कर्म (करनि) में से किसके बारे में कहा गया है, वाच्य (काथा) कहलाता है।

कुरमाली में दो वाच्य: हिंदी में तीन वाच्य हैं (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य), पर ग्रंथ कुरमाली में दो मानता है — करमिक काथा (कर्तृवाच्य) और करनिक काथा (कर्मवाच्य)।
वाच्यकुरमाली नामपहचानउदाहरण (ग्रंथ से)
कर्तृवाच्यकरमिक काथाक्रिया कर्ता के लिंग, वचन और कारक के अनुसारराम पढ़ेइस आहे। सीता पढ़ेइस आही। फागु आर जेठुइं खात ला।
कर्मवाच्यकरनिक काथाक्रिया कर्म के लिंग, वचन और कारक के अनुसाररामेक दारा गायटी नि दुहाली। सीताक दारा गरूटा नि खुँटाल। साँढ़ किनाल गेलाक। गाय किनाल गेली।

कर्मवाच्य के उदाहरणों में क्रिया दुहाली (स्त्रीलिंग — गायटी के अनुसार) और खुँटाल (गरूटा के अनुसार) कर्म से मेल खाती है।

खास नियम: लेहरा लिंगयदि वाक्य में "से" या "दारा" (द्वारा) न हो, तो कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के अनुसार नहीं, लेहरा (नपुंसक) लिंग में रहती है: रामे गायटी के खेदलेइक। सीताइं गायटी के खेदलेइक। रामे गरूटा के खुँटलेइक। — कर्ता राम हो या सीता, कर्म गाय हो या गरू, क्रिया खेदलेइक / खुँटलेइक ही रहती है।

विराम चिह्न (थाँभान चिनहा)

थांभा का अर्थ है "रुकना"। लिखते या पढ़ते समय भाव स्पष्ट करने के लिए जहाँ थोड़ा रुकते हैं, वहाँ लगाए जाने वाले चिह्न विराम चिह्न (थाँभान चिनहा / थांभाजुकति) हैं। इनका सही प्रयोग न हो तो भाव समझना कठिन हो जाता है।

#विराम चिह्नकुरमाली नामचिह्न
1अल्प विरामटुकुटेका,
2अर्द्ध विरामदर टेका;
3अपूर्ण विरामअपूरन टेका:
4पूर्ण विरामटेका।
5प्रश्नवाचक चिह्नखंचानु चिनहा?
6विस्मयादिबोधक चिह्नबधान चिनहा!
7उद्धरण चिह्नढेंसा चिनहा“ ”
8निर्देशक चिह्नसझऽ डांड़—
9योजक / विभाजकजड़ बा घटाव-
10विवरण चिह्नबरनन चिनहा:-
11कोष्ठकघेरा / बांधन चिनहा( ) { } [ ]
12जोड़जड़ चिनहा+
13घटावघटाव चिनहा−
14गुणागुन चिनहा×
याद रखने का सूत्रटेका = रुकाव: टुकु (छोटा) टेका = अल्प, दर (आधा) टेका = अर्द्ध, अपूरन टेका = अपूर्ण, केवल टेका = पूर्ण विराम।

पारिभाषिक शब्दावली

हिंदीकुरमालीEnglish
वाक्यटुमSentence
उद्देश्यधेइSubject
विधेयखेइPredicate
सरल वाक्यमटामटि टुमSimple sentence
मिश्र वाक्यजड़न / मेसानु टुमComplex sentence
संयुक्त वाक्यभजानु टुमCompound sentence
निषेधवाचकबारन टुमNegative
आज्ञावाचकआड़हान टुमImperative
प्रश्नवाचकखँच टुमInterrogative
इच्छावाचकबांछा टुमOptative
संदेहवाचकदगधा टुमDoubtful
वाच्यकाथाVoice
कर्तृवाच्यकरमिक काथाActive voice
कर्मवाच्यकरनिक काथाPassive voice
विराम चिह्नथाँभान चिनहाPunctuation

अभ्यास प्रश्न

  1. कुरमाली में "वाक्य" को क्या कहते हैं?

    1. (क) साड़ा
    2. (ख) टुम
    3. (ग) काथा
    4. (घ) आखड़
    उत्तर देखें

    (ख) टुम = वाक्य।

  2. उद्देश्य (Subject) को कुरमाली में क्या कहते हैं?

    1. (क) धेइ
    2. (ख) खेइ
    3. (ग) करनि
    4. (घ) टुम
    उत्तर देखें

    (क) धेइ = उद्देश्य।

  3. "विधेय" का कुरमाली नाम है —

    1. (क) धेइ
    2. (ख) टेका
    3. (ग) काथा
    4. (घ) खेइ
    उत्तर देखें

    (घ) खेइ = विधेय।

  4. सरल वाक्य को कुरमाली में क्या कहते हैं?

    1. (क) भजानु टुम
    2. (ख) जड़न टुम
    3. (ग) मटामटि टुम
    4. (घ) बारन टुम
    उत्तर देखें

    (ग) मटामटि = साधारण।

  5. "भजानु टुम" किस वाक्य का नाम है?

    1. (क) सरल
    2. (ख) संयुक्त
    3. (ग) मिश्र
    4. (घ) प्रश्नवाचक
    उत्तर देखें

    (ख) स्वतंत्र वाक्यों का जुड़ाव।

  6. "जड़न / मेसानु टुम" किस वाक्य का नाम है?

    1. (क) मिश्र
    2. (ख) संयुक्त
    3. (ग) सरल
    4. (घ) संकेतवाचक
    उत्तर देखें

    (क) प्रधान + आश्रित उपवाक्य।

  7. "ओंय आवल आर मोंय गेलों" — रचना की दृष्टि से कौन-सा वाक्य है?

    1. (क) सरल
    2. (ख) मिश्र
    3. (ग) संदेहवाचक
    4. (घ) संयुक्त
    उत्तर देखें

    (घ) दो स्वतंत्र वाक्य "आर" से जुड़े।

  8. अर्थ के आधार पर कुरमाली वाक्य के कितने भेद बताए गए हैं?

    1. (क) 6
    2. (ख) 5
    3. (ग) 8
    4. (घ) 3
    उत्तर देखें

    (ग) विधि, निषेध, आज्ञा, प्रश्न, विस्मय, इच्छा, संदेह, संकेत।

  9. "तर मनेक साध पूरन हेउक" किस प्रकार का वाक्य है?

    1. (क) आज्ञावाचक
    2. (ख) इच्छावाचक (बांछा टुम)
    3. (ग) संदेहवाचक
    4. (घ) प्रश्नवाचक
    उत्तर देखें

    (ख) इच्छा — हो।

  10. "ओंय आपन काम पाइट करल हेताक" किस प्रकार का वाक्य है?

    1. (क) संदेहवाचक (दगधा टुम)
    2. (ख) संकेतवाचक
    3. (ग) निषेधवाचक
    4. (घ) विधिवाचक
    उत्तर देखें

    (क) "हेताक" — होगा।

  11. "न ससुर आवल न सास" किस प्रकार का वाक्य है?

    1. (क) विस्मयादिबोधक
    2. (ख) प्रश्नवाचक
    3. (ग) इच्छावाचक
    4. (घ) निषेधवाचक (बारन टुम)
    उत्तर देखें

    (घ) न … न।

  12. "जदि पढ़ेतेलिस तऽ इ दासा नि हेइतेलोऊ" किस प्रकार का वाक्य है?

    1. (क) संदेहवाचक
    2. (ख) आज्ञावाचक
    3. (ग) संकेतवाचक
    4. (घ) सरल
    उत्तर देखें

    (ग) जदि … तऽ।

  13. कुरमाली में वाच्य को क्या कहते हैं?

    1. (क) टुम
    2. (ख) काथा
    3. (ग) टेका
    4. (घ) करमि
    उत्तर देखें

    (ख) काथा = वाच्य।

  14. ग्रंथ के अनुसार कुरमाली में कितने वाच्य हैं?

    1. (क) 2
    2. (ख) 1
    3. (ग) 3
    4. (घ) 4
    उत्तर देखें

    (क) करमिक और करनिक काथा।

  15. कर्मवाच्य का कुरमाली नाम है —

    1. (क) करमिक काथा
    2. (ख) दारा काथा
    3. (ग) भाव काथा
    4. (घ) करनिक काथा
    उत्तर देखें

    (घ) करनि = कर्म।

  16. "रामेक दारा गायटी नि दुहाली" में क्रिया "दुहाली" किसके अनुसार है?

    1. (क) कर्ता (राम)
    2. (ख) काल
    3. (ग) कर्म (गायटी)
    4. (घ) लेहरा लिंग
    उत्तर देखें

    (ग) करनिक काथा।

  17. "से/दारा" न होने पर कर्मवाच्य में क्रिया किस लिंग में रहती है?

    1. (क) नर लिंग
    2. (ख) लेहरा लिंग
    3. (ग) मादा लिंग
    4. (घ) दुजिलिंग
    उत्तर देखें

    (ख) रामे गायटी के खेदलेइक।

  18. पूर्ण विराम (।) का कुरमाली नाम है —

    1. (क) टेका
    2. (ख) टुकुटेका
    3. (ग) दर टेका
    4. (घ) अपूरन टेका
    उत्तर देखें

    (क) टेका।

  19. अल्प विराम (,) को कुरमाली में क्या कहते हैं?

    1. (क) बरनन चिनहा
    2. (ख) टेका
    3. (ग) सझऽ डांड़
    4. (घ) टुकुटेका
    उत्तर देखें

    (घ) टुकु = छोटा।

  20. "ढेंसा चिनहा" कौन-सा विराम चिह्न है?

    1. (क) कोष्ठक
    2. (ख) प्रश्नवाचक
    3. (ग) उद्धरण चिह्न
    4. (घ) योजक
    उत्तर देखें

    (ग) “ ”

संदर्भ

ये नोट्स हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। नियमों और उदाहरणों का मिलान इन मानक स्रोतों से किया गया है:

  • डॉ. हरदेव नारायण सिंह, "कुरमाली व्याकरण", झारखण्ड झरोखा, राँची, 2017 (ISBN 978-93-85595-21-9), पृ. 60–65