झारज्ञान

पत्र 1 · हिंदी भाषा ज्ञान · अध्याय 13

अपठित गद्यांश

पत्र 1 के हिंदी भाग में 30 प्रश्न अपठित गद्यांश से आते हैं — यानी व्याकरण के बराबर। सही विधि से ये सबसे तेज़ और पक्के अंक देने वाले प्रश्न हैं।

अंतिम अपडेट: 2026-10-14

इस अध्याय में
  1. अपठित गद्यांश क्या है
  2. हल करने की विधि
  3. प्रश्नों के प्रकार और तरकीबें
  4. शीर्षक कैसे चुनें
  5. समय-प्रबंधन
  6. अभ्यास गद्यांश 1: झारखंड के वन
  7. अभ्यास गद्यांश 2: सरहुल और प्रकृति
  8. अभ्यास गद्यांश 3: शिक्षा और आत्मनिर्भरता

अपठित गद्यांश क्या है

अपठित = जो पहले पढ़ा न गया हो। परीक्षा में एक नया गद्यांश दिया जाता है और उसी पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें उत्तर गद्यांश के भीतर ही होते हैं — आपका काम उन्हें तेज़ी और सटीकता से ढूँढना है, अपनी राय देना नहीं।

JSSC पत्र 1 में हिंदी भाग के 60 में से 30 प्रश्न अपठित गद्यांश पर होते हैं (शेष 30 व्याकरण पर)। प्रायः एक गद्यांश पर 5-6 प्रश्न आते हैं। पत्र 1 क्वालिफ़ाइंग है, पर इसमें 30% से कम आने पर पत्र 2 और 3 जाँचे ही नहीं जाते।

हल करने की विधि

  1. पहले प्रश्न पढ़ें, फिर गद्यांश। प्रश्न जानने से गद्यांश पढ़ते समय आपकी नज़र उत्तर ढूँढ रही होती है।
  2. गद्यांश एक बार ध्यान से पूरा पढ़ें — केंद्रीय भाव (लेखक क्या कहना चाहता है) पकड़ें। हर अनुच्छेद का मुख्य विचार मन में एक-एक शब्द में बाँध लें।
  3. प्रश्नों के मुख्य शब्द (नाम, संख्या, विशेष शब्द) गद्यांश में खोजें और उसके आस-पास की पंक्तियाँ दोबारा पढ़ें।
  4. विकल्पों को मिलाएँ — सही उत्तर अक्सर गद्यांश के शब्दों में नहीं, उनके अर्थ में होता है। गद्यांश के शब्द ज्यों के त्यों वाले विकल्प कभी-कभी जाल होते हैं।
  5. अपनी जानकारी न जोड़ें — उत्तर वही जो गद्यांश कहता है, भले आप कुछ और जानते हों।
  6. व्याकरण वाले प्रश्न (विलोम, पर्यायवाची, समास, प्रत्यय, संधि) गद्यांश पढ़े बिना भी हल हो सकते हैं — इन्हें पहले कर लें।

प्रश्नों के प्रकार और तरकीबें

प्रकारउदाहरणतरकीब
तथ्यात्मक (सीधा)"गद्यांश के अनुसार ... क्या है?"मुख्य शब्द खोजें; उत्तर सीधे लिखा होता है।
केंद्रीय भाव / उद्देश्य"लेखक का मुख्य उद्देश्य क्या है?"पहला और अंतिम वाक्य देखें — केंद्रीय भाव प्रायः वहीं होता है।
अनुमानात्मक"गद्यांश से क्या निष्कर्ष निकलता है?"जो बात गद्यांश से तार्किक रूप से निकले; बहुत व्यापक या बहुत संकीर्ण विकल्प छोड़ें।
शीर्षक"उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?"नीचे देखें।
शब्दार्थ"'प्रासंगिक' शब्द का अर्थ है —"संदर्भ के वाक्य में विकल्प रखकर देखें।
व्याकरणविलोम, पर्यायवाची, समास, संधि, प्रत्यय, वाक्य-भेदव्याकरण के अध्याय याद हों तो सीधे हल।
कथन सत्य/असत्य"कौन-सा कथन गद्यांश के अनुसार सही नहीं है?"हर विकल्प को गद्यांश से मिलाएँ; "नहीं" वाले प्रश्न में सावधान।
"सदैव", "केवल", "कभी नहीं" वाले विकल्प जिन विकल्पों में निरपेक्ष शब्द (सदैव, केवल, बिल्कुल, सभी, कभी नहीं) हों, वे प्रायः गलत होते हैं — जब तक गद्यांश में वही बात इतनी ही दृढ़ता से न कही गई हो।

शीर्षक कैसे चुनें

समय-प्रबंधन

पत्र 1 में 120 प्रश्नों के लिए 2 घंटे हैं — यानी प्रति प्रश्न 1 मिनट। गद्यांश पढ़ने में 2-3 मिनट लगाएँ, फिर उसके 5-6 प्रश्न 4-5 मिनट में करें। व्याकरण वाले प्रश्न पहले हल करके समय बचाएँ। अंग्रेज़ी गद्यांश के लिए भी यही विधि अपनाएँ।

अभ्यास गद्यांश 1: झारखंड के वन

झारखंड का नाम ही बताता है कि यह वनों की भूमि है। छोटानागपुर के पठार पर फैले साल, महुआ, पलाश और केंद के जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन का आधार हैं। गाँवों के लोग इन वनों से लकड़ी, फल, पत्ते, औषधियाँ और लाह जैसी उपज प्राप्त करते हैं। महुआ के फूल और बीज, साल के पत्तों से बने दोने-पत्तल और केंद के पत्ते आज भी अनेक परिवारों की आय का साधन हैं। पर वनों का महत्व केवल आर्थिक नहीं है। वन वर्षा को नियंत्रित करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और नदियों को जीवन देते हैं। दामोदर, स्वर्णरेखा और कोयल जैसी नदियों का जलस्तर इन्हीं वनों की हरियाली पर निर्भर है। दुर्भाग्य से खनन, अवैध कटाई और बढ़ती आबादी के कारण वनों पर संकट गहराता जा रहा है। जब वन घटते हैं तो केवल पेड़ नहीं कटते, एक पूरी संस्कृति और जीवन-पद्धति खतरे में पड़ जाती है। इसलिए विकास की योजनाएँ ऐसी होनी चाहिए जो वनों को नष्ट किए बिना लोगों का जीवन बेहतर बनाएँ। वन बचेंगे तो झारखंड बचेगा।

गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. गद्यांश के अनुसार झारखंड के वन किसके आधार हैं?

    1. (क) लाखों लोगों के जीवन के
    2. (ख) केवल उद्योगों के
    3. (ग) केवल पशुओं के
    4. (घ) केवल खनन के
    उत्तर देखें

    (क) "…बल्कि लाखों लोगों के जीवन का आधार हैं।"

  2. वनों का कौन-सा लाभ गद्यांश में नहीं बताया गया है?

    1. (क) वर्षा पर नियंत्रण
    2. (ख) मिट्टी के कटाव को रोकना
    3. (ग) नदियों को जीवन देना
    4. (घ) बिजली बनाना
    उत्तर देखें

    (घ) बिजली का उल्लेख नहीं है।

  3. वनों पर संकट का कारण गद्यांश में क्या बताया गया है?

    1. (क) केवल वर्षा की कमी
    2. (ख) केवल पर्यटन
    3. (ग) खनन, अवैध कटाई और बढ़ती आबादी
    4. (घ) विदेशी व्यापार
    उत्तर देखें

    (ग) तीनों कारण स्पष्ट लिखे हैं।

  4. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक होगा —

    1. (क) महुआ के फूल
    2. (ख) झारखंड की नदियाँ
    3. (ग) झारखंड के वन: जीवन का आधार
    4. (घ) खनन उद्योग
    उत्तर देखें

    (ग) पूरा गद्यांश वनों के महत्व और संरक्षण पर है।

  5. "अवैध" का विलोम है —

    1. (क) अवैधानिक
    2. (ख) वैध
    3. (ग) निषिद्ध
    4. (घ) अनुचित
    उत्तर देखें

    (ख) अवैध ↔ वैध।

  6. "जीवन-पद्धति" में कौन-सा समास है?

    1. (क) द्वंद्व
    2. (ख) तत्पुरुष (जीवन की पद्धति)
    3. (ग) बहुव्रीहि
    4. (घ) द्विगु
    उत्तर देखें

    (ख) जीवन की पद्धति — संबंध तत्पुरुष।

अभ्यास गद्यांश 2: सरहुल और प्रकृति

सरहुल झारखंड के आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व है, जो वसंत ऋतु में साल के पेड़ों पर नए फूल आने के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध का उत्सव है। गाँव का पाहन सरना स्थल पर पूजा करता है और साल के फूलों को सबके बीच बाँटा जाता है। लोग मानते हैं कि धरती और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट किए बिना नई फसल और नए वर्ष का स्वागत अधूरा है। इस अवसर पर ढोल और मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य होता है, जिसमें छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष सभी मिलकर भाग लेते हैं। सरहुल हमें सिखाता है कि प्रकृति कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसका केवल उपभोग किया जाए; वह हमारी माँ है, जिसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण-संकट से जूझ रही है, तब ऐसे पर्वों का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। आधुनिकता की दौड़ में यदि हम अपनी इन परंपराओं के मूल भाव को भूल गए, तो केवल एक त्योहार नहीं, प्रकृति के साथ जीने का एक पूरा दर्शन खो देंगे।

गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. सरहुल कब मनाया जाता है?

    1. (क) शीत ऋतु में
    2. (ख) फसल कटने के बाद शरद में
    3. (ग) वर्षा ऋतु में
    4. (घ) वसंत ऋतु में, साल के पेड़ों पर नए फूल आने पर
    उत्तर देखें

    (घ) "वसंत ऋतु में साल के पेड़ों पर नए फूल आने के साथ"।

  2. गद्यांश के अनुसार सरहुल किसका उत्सव है?

    1. (क) केवल नई फसल का
    2. (ख) मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध का
    3. (ग) केवल नृत्य-संगीत का
    4. (घ) व्यापार का
    उत्तर देखें

    (ख) "मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध का उत्सव"।

  3. सरना स्थल पर पूजा कौन करता है?

    1. (क) पाहन
    2. (ख) मुखिया
    3. (ग) पुजारी
    4. (घ) ग्राम सेवक
    उत्तर देखें

    (क) "गाँव का पाहन सरना स्थल पर पूजा करता है"।

  4. लेखक के अनुसार प्रकृति क्या है?

    1. (क) केवल उपभोग की वस्तु
    2. (ख) हमारी माँ, जिसकी रक्षा हमारा कर्तव्य है
    3. (ग) व्यापार का साधन
    4. (घ) पूजा की मूर्ति
    उत्तर देखें

    (ख) अंतिम भाग का केंद्रीय संदेश।

  5. "प्रासंगिक" शब्द का अर्थ है —

    1. (क) पुराना
    2. (ख) कठिन
    3. (ग) संदर्भ के अनुकूल / आज के समय में उपयोगी
    4. (घ) अनावश्यक
    उत्तर देखें

    (ग) "आज … संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है" — आज के संदर्भ में उपयोगी।

  6. "सामूहिक" में प्रत्यय है —

    1. (क) -इक
    2. (ख) -हिक
    3. (ग) -मूहिक
    4. (घ) -क
    उत्तर देखें

    (क) समूह + इक = सामूहिक (पहला स्वर वृद्धि)।

अभ्यास गद्यांश 3: शिक्षा और आत्मनिर्भरता

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सोचने, समझने और अपने पैरों पर खड़े होने योग्य बनाना है। जो शिक्षा मनुष्य में आत्मविश्वास और विवेक नहीं जगाती, वह अधूरी है। गाँव का एक युवक यदि पढ़-लिखकर अपने ही गाँव में खेती के नए तरीके अपनाता है, सहकारी समिति बनाता है या छोटे उद्योग शुरू करता है, तो वह भी उतना ही सफल है जितना किसी बड़े शहर में नौकरी करने वाला। दुर्भाग्य से हमारे समाज में सफलता को अक्सर केवल सरकारी नौकरी से जोड़कर देखा जाता है। परिणाम यह होता है कि अनेक प्रतिभाशाली युवक वर्षों तक केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहते हैं और असफल होने पर स्वयं को निरर्थक समझने लगते हैं। परीक्षा की तैयारी करना बुरा नहीं, पर साथ ही कोई कौशल सीखना भी आवश्यक है। आत्मनिर्भरता का अर्थ है कि मनुष्य परिस्थितियों का दास न बने, बल्कि उनसे लड़ने का सामर्थ्य रखे। सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को हर परिस्थिति में सम्मान के साथ जीना सिखाए।

गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. लेखक के अनुसार शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है?

    1. (क) केवल नौकरी पाना
    2. (ख) व्यक्ति को सोचने-समझने और आत्मनिर्भर बनाना
    3. (ग) डिग्री प्राप्त करना
    4. (घ) शहर में बसना
    उत्तर देखें

    (ख) पहला वाक्य।

  2. गद्यांश के अनुसार गाँव में खेती के नए तरीके अपनाने वाला युवक —

    1. (क) असफल है
    2. (ख) शिक्षित नहीं है
    3. (ग) केवल किसान है
    4. (घ) शहर में नौकरी करने वाले जितना ही सफल है
    उत्तर देखें

    (घ) "वह भी उतना ही सफल है…"

  3. लेखक किस बात को "दुर्भाग्य" कहता है?

    1. (क) युवकों का पढ़ना
    2. (ख) सफलता को केवल सरकारी नौकरी से जोड़ना
    3. (ग) परीक्षाओं का होना
    4. (घ) खेती करना
    उत्तर देखें

    (ख) "दुर्भाग्य से … सफलता को अक्सर केवल सरकारी नौकरी से जोड़कर देखा जाता है।"

  4. लेखक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में क्या कहता है?

    1. (क) तैयारी करना बुरा है
    2. (ख) केवल तैयारी ही करें
    3. (ग) तैयारी बुरी नहीं, पर साथ में कौशल भी सीखें
    4. (घ) परीक्षा छोड़ दें
    उत्तर देखें

    (ग) "परीक्षा की तैयारी करना बुरा नहीं, पर साथ ही कोई कौशल सीखना भी आवश्यक है।"

  5. "आत्मनिर्भरता" में संधि-विच्छेद/रचना क्या है?

    1. (क) आत्म + निर्भर + ता
    2. (ख) आत्मा + निर् + भरता
    3. (ग) आत्म + नि + र्भरता
    4. (घ) आत्मनि + र्भरता
    उत्तर देखें

    (क) आत्म (स्व) + निर्भर + ता (भाववाचक प्रत्यय)।

  6. "निरर्थक" का विलोम है —

    1. (क) सार्थक
    2. (ख) व्यर्थ
    3. (ग) अनर्थ
    4. (घ) अर्थहीन
    उत्तर देखें

    (क) निरर्थक ↔ सार्थक।

नोटइस पेज के तीनों गद्यांश झारज्ञान द्वारा मौलिक रूप से लिखे गए हैं। गद्यांश में आए व्याकरण प्रश्नों के लिए देखें: समास · उपसर्ग और प्रत्यय · पर्यायवाची और विलोम